जिन हाथों में योग की मुद्राएँ और माला होनी चाहिए थी, उन्हीं हाथों में आज 500-500 रुपये के नकली नोटों के बंडल हैं! सूरत का एक तथाकथित योग गुरु और जमीन दलाल रातोंरात अमीर बनने की ऐसी राह पर चढ़ गया कि घर के एक कोने में ही कलर प्रिंटर लगाकर ‘लक्ष्मीजी’ छापने लगा। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने जब फॉर्च्यूनर कार रोकी, तो उसके अंदर से इतनी नकदी निकली कि पुलिस गिनते-गिनते थक गई और आखिरकार बैंक से नोट गिनने की मशीन मंगवानी पड़ी। इस हाई-प्रोफाइल रैकेट में 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
धन की कमी पड़ते ही योग गुरु बन गया ‘नकली नोटों का सौदागर’
इस मामले में मुख्य आरोपी के रूप में सूरत के कामरेज के पास ‘श्री सत्यम योग फाउंडेशन’ चलाने वाले प्रदीप जोटंगिया का नाम सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि प्रदीप योग कक्षाओं के जरिए लोगों के असाध्य रोग दूर करने का दावा करता था। हालांकि, संस्था चलाने के लिए पर्याप्त धन न मिलने पर उसने रातोंरात अमीर बनने के लिए नकली नोट छापने का रास्ता अपना लिया। सेवा के नाम पर चल रही इस एनजीओ के संचालक ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर पूरा नेटवर्क खड़ा कर लिया था।
नकली नोट छापना क्यों शुरू किया?
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कबूल किया कि वे आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे। खास तौर पर प्रदीप जोटंगिया को अपनी संस्था चलाने और मरीजों के लिए सुविधाए खड़ी करने के लिए पैसों की जरूरत थी। दूसरी ओर जमीन दलाल मुकेश ठुम्मर भी आर्थिक संकट में था, इसलिए इस गिरोह ने मिलकर शॉर्टकट अपनाया। असली जैसी दिखने वाली नकली नोटें छापकर बाजार में चलाने का उनका इरादा था, ताकि वे अपनी आर्थिक जरूरतें और लग्जरी लाइफस्टाइल पूरी कर सकें।
Image Source : reporter inputपुलिस की गिरफ्त में आरोपी।
3 महीनों से मकान में चल रही थी मिनी ‘नासिक प्रेस’
पुलिस जांच में सामने आया कि नकली नोटों का यह कारखाना पिछले तीन महीनों से सूरत के सरथाणा इलाके में स्थित कृष्णा रो-हाउस में धड़ल्ले से चल रहा था। आरोपी मुकेश ठुम्मर ने अपने दो मंजिला मकान में ही कलर प्रिंटर, कटर मशीन और खास तरह का कागज लाकर नकली नोट छापने शुरू कर दिए थे। उसने चीन से ऐसे विशेष कागज मंगवाए थे, जो असली नोटों जैसे दिखाई देते थे। इसके बाद उन्हीं कागजों पर प्रिंटिंग कर नकली करेंसी तैयार की जाती थी। हैरानी की बात यह है कि उसके मकान की पहली मंजिल पर किरायेदार रहते थे, फिर भी किसी को भनक न लगे, इस तरह यह गिरोह दिन-रात 500 रुपये के नोट छापने में जुटा रहता था।
पुलिस के जाल में कैसे फंसे?
आरोपी सूरत से अपनी लग्जरी फॉर्च्यूनर कार (GJ-05-RS-5252) में करोड़ों रुपये के नकली नोट भरकर ग्राहकों की तलाश में अहमदाबाद आए थे। कार के अंदर काले रंग के बैग और सफेद थैलों में 500 रुपये के नोटों के लगभग 440 बंडल व्यवस्थित तरीके से पैक किए गए थे। हालांकि, क्राइम ब्रांच ने तकनीकी निगरानी और मानव खुफिया सूचना की मदद से इस कार को पकड़ लिया। अंदर तलाशी लेने पर पुलिस अधिकारी भी एक पल के लिए दंग रह गए।
इस गिरोह में हर सदस्य को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई थी। कोई कागज की व्यवस्था करता था, तो कोई ग्राहक ढूंढ़ने का काम करता था। महिला आरोपी आरती बेन की भी इस रैकेट में सक्रिय भूमिका होने का खुलासा पुलिस जांच में हुआ है।
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मुकेश ठुम्मर के घर से प्रिंटर और लिक्विड जब्त
अहमदाबाद में गिरफ्तारी के बाद पुलिस की एक टीम तुरंत सूरत पहुंची। सूरत क्राइम ब्रांच और सरथाणा पुलिस की मदद से मुकेश ठुम्मर के घर पर तलाशी ली गई। वहां से 500 रुपये के नोटों के 28 और बंडल (28 लाख रुपये), एक कलर प्रिंटर, कागज की 8 रीम और नोट छापने में इस्तेमाल होने वाला विशेष लिक्विड बरामद किया गया। सबूतों के आधार पर यही मकान पूरे रैकेट का केंद्र साबित हुआ है।
सूरत से अहमदाबाद तक फैला हुआ नेटवर्क
पुलिस अब इस दिशा में जांच कर रही है कि इस गिरोह ने पहले बाजार में कितनी नकली नोटें चला दी हैं। प्रारंभिक जांच में प्रदीप और मुकेश इस रैकेट के सरगना प्रतीत हो रहे हैं। वे सूरत के आसपास के इलाकों में भी नोटों की सप्लाई करते थे या नहीं, इसकी पूछताछ जारी है। जमीन दलाली और हीरा उद्योग से जुड़े लोगों की संलिप्तता के कारण आर्थिक लेन-देन की गहराई से जांच की जाएगी।
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