इन दिनों लोग फल सब्जी खाने से भी डरने लगे हैं। खाने-पीने की चीजों में जितनी मिलावट हो रही है वो शरीर में कई खतरनाक बीमारियां पैदा कर रही हैं। खेती में हानिकारक पेस्टिसाइड्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय रिसर्च सामने आई है जिसमें बताया गया है कि जिन इलाकों में पेस्टिसाइड्स का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है वहां रहने वाले लोगों में कुछ प्रकार के कैंसर होने का खतरा 150 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इसके अलावा पेस्टिसाइड्स वाले फल, सब्जी और अनाज खाना भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। कैंसर सर्जन डॉक्टर जयेश शर्मा ने बताया कि क्या वाकई पेस्टिसाइड्स और कीटनाशक दवाओं से कैंसर हो सकता है। अगर हां तो इससे कैसे बचा जा सकता है।
क्या कीटनाशकों से कैंसर हो सकता है?
रायपुर स्थित कैंसर स्पेशलिस्ट डॉक्टर जयेश शर्मा ने बताया कि कीटनाशक दो समूहों के लोगों को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित करते हैं। पहला समूह किसानों का है, जो फसलों पर कीटनाशकों का छिड़काव करते हैं और बाकी आबादी की तुलना में इनके संपर्क में अधिक आते हैं। ऐसे लोगों में कीटनाशकों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से ल्यूकेमिया और लिंफोमा जैसे कैंसर होने के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं । हालांकि, जो लोग केवल भोजन के माध्यम से कीटनाशकों के संपर्क में आते हैं, उनकी स्थिति अलग है।
खतरनाक कीटनाशक कौन से हैं?
डॉक्टर ने बताया कि कीटनाशक दो तरह के होते हैं। पुराने ऑर्गेनोक्लोरीन कीटनाशक जैसे कि डीडीटी पर अब बैन लग चुका है। ये यौगिक दशकों तक मिट्टी में बने रहते हैं। पौधे इन्हें अपनी जड़ों के जरिए ग्रहण करते हैं। ये फल और सब्जियों में पहुंच जाते हैं। इस तरह के फल सब्जी खाने से ब्रेस्ट कैंसर और कुछ प्रजनन अंगों के कैंसर का खतरा पैदा हो सकता है।
कीटनाशकों का असर कब तक रहता है?
अच्छी बात ये है कि अब इन कीटनाशकों का उपयोग बहुत कम हो गया है। अब जो कीटनाशक इस्तेमाल किए जाते हैं उनकी लाइफ 3-10 दिन होती है। इसलिए ये फल सब्जियों के जरिए जब तक हमारे घरों में पहुंचते हैं तब तक ये डिग्रेट हो चुके होते हैं। हालांकि नए कीटनाशकों और कैंसर के बीच कोई पुख्ता संबंध साबित नहीं हुआ है, लेकिन लंबे समय तक थोड़ी मात्रा में भी इनके संपर्क में आने से कुछ रिस्क हो सकता है।
पेस्टिसाइड्स और कीटनाशक से कैसे बचें?
पहला तरीका- फलों और सब्जियों को बहते पानी में धोएं और फिर उन्हें हाथों से रगड़कर साफ करें। भिगोने से उतना अच्छा परिणाम नहीं मिलता जितना बहते पानी से धोने से मिलता है।
पत्तागोभी जैसी सब्जियों के बाहरी पत्ते निकाल लें। पालक जैसी हरी सब्जियों के पूरे गुच्छे को एक साथ नहीं, बल्कि हर पत्ते को अलग-अलग धोएं। सब्जियों को प्रेशर कुकर में पकाना, उबालना और तड़का लगाना कीटनाशक अणुओं को तोड़ने में मदद करते हैं, इसलिए भोजन खाने से पहले उसे पकाना जरूरी है।
दूसरा तरीका- आधा लीटर पानी लें और उसमें एक चम्मच नमक डालें। सब्जियों को उसमें पांच मिनट के लिए भिगो दें और फिर पानी को निकाल दें और बहते पानी के नीचे सब्जियों और फलों को धोएं। फल जैसे सेब, अमरूद और खीरे का छिलका हटा दें, क्योंकि बाहरी परत में अधिक कीटनाशक होते हैं। बेमौसम के फलों और सब्जियों पर अधिक कीटनाशक होते हैं, इसलिए मौसमी खाद्य पदार्थों का सेवन करने का प्रयास करें।
तीसरा तरीका- सब्जियों को पानी और बेकिंग सोडा के घोल में 10 से 15 मिनट तक भिगो दें, फिर बहते पानी से धो लें। सबसे ज्यादा खपत होने वाले फल और सब्जियां ही खरीदें। इसमें कीटनाशकों की मात्रा कम होती है। घर के बगीचे या बालकनी में धनिया, पुदीना और टमाटर जैसी सब्जियां खुद उगाएं।
Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)
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