आज देश की नजर एक ही सवाल पर टिकी है, बजट कैसा होगा ? महंगाई घटेगी या बढ़ेगी ? पेट्रोल सस्ता होगा या महंगा ? टैक्स में राहत मिलेगी या नहीं लेकिन आज सवाल सिर्फ पैसों का नहीं है। इस बार वित्त मंत्री से उम्मीद है हेल्थ बजट बढ़े। अभी भारत स्वास्थ पर कुल बजट का करीब 2% खर्च करता है। डिमांड है कि इसे 5% तक बढ़ाया जाए, ताकि प्राइमरी हेल्थ मजबूत हो। इलाज से पहले बचाव पर काम हो। तभी तो इस बार बजट का फोकस प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पर है। हर साल 'आयुष मूनशॉट मिशन' के तहत डायबिटीज, आर्थराइटिस, पार्किंसंस जैसी क्रॉनिक बीमारियों पर वैज्ञानिक ट्रायल और रिसर्च पर 500 करोड़ रुपये लगाने की प्लानिंग है ताकि इलाज सिर्फ महंगा न हो बल्कि सुरक्षित भी हो। हालांकि, बाबा रामदेव का मानना है कि सरकार सिर्फ रास्ता दिखा सकती है लेकिन सेहत का सबसे बड़ा निवेश हमें खुद करना होगा बजट देश की तक़दीर बनाता है और योग स्वस्थ जीवन की तस्वीर
बिगड़ी लाइफस्टाइल है सेहत के लिए खतरा
Economic Survey ने पहली बार साफ कहा है भारत की सेहत पर सबसे बड़ा खतरा अब वायरस नहीं, बल्कि बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल है। आज डायबिटीज, हार्ट डिजीज, कैंसर जैसी नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियां देश के लिए सबसे बढ़ा खतरा है। 4 साल बाद,भारत में होने वाली 75% मौतों की वजह ये बीमारियां बन सकती हैं। बीमार आबादी परिवार की कमाई, देश की प्रोडक्टिविटी और पूरी अर्थव्यवस्था पर बोझ बन जाती हैं। ये बीमारी खराब आदतों का नतीजा है। कोई भी बजटिंग और प्लानिंग तब तक कामयाब नहीं होगी। जब तक खान-पान बिगड़ा रहेगा, नींद उड़ी रहेगी। मोबाइल का बेजा इस्तेमाल होता रहेगा। ऐसे में बीमारियां चुपचाप अंदर घर बनाती जाएंगी।
हेल्थ बजट से बॉडी होगी परफेक्ट
अक्सर लोग सोचते हैं कि परफेक्ट बॉडी पाने के लिए महंगा डाइट प्लान, जिम और सप्लीमेंट्स ज़रूरी होते हैं, लेकिन सच यह है कि सही जानकारी और बैलेंस्ड हेल्थ बजट से भी शरीर को फिट, एक्टिव और शेप में रखा जा सकता है। सवाल बस इतना है कि परफेक्ट वजन कितना हो, शरीर को कौन-से न्यूट्रिएंट्स कितनी मात्रा में चाहिए, किस अंग को कितनी कैलोरी और किस बॉडी पार्ट के लिए कौन-सा योग सबसे असरदार है।
हर दिन कितनी कैलोरी जरुरी?
शरीर को सही तरीके से काम करने, एनर्जी बनाए रखने और वजन कंट्रोल में रखने के लिए रोज़ाना कैलोरी का संतुलन बेहद ज़रूरी होता है। उम्र, काम और एक्टिविटी लेवल के हिसाब से कैलोरी की ज़रूरत बदल सकती है, लेकिन सामान्य तौर पर पुरुष रोज़ाना करीब 2500 कैलोरी की ज़रूरत होती है और महिला: रोज़ाना लगभग 2000 कैलोरी लेना पर्याप्त माना जाता है।
वेट कैसे होगा परफेक्ट
खराब लाइफस्टाइल, अनियमित खान-पान और फिजिकल एक्टिविटी की कमी से वेट प्रॉब्लम शुरू होती है। जरूरत से ज़्यादा कैलोरी लेने पर वजन बढ़ता है, जबकि लंबे समय तक कम कैलोरी इनटेक से तेजी से वजन घटने लगता है। सही हेल्थ बजट यानी बैलेंस्ड डाइट और कंट्रोल्ड कैलोरी से ही वेट को परफेक्ट रखा जा सकता है।
कैसे होगी सेहत बेहतर?
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड, पैकेट वाला खाना, शुगरी ड्रिंक्स घंटों मोबाइल स्क्रीन ये आदतें धीरे-धीरे पूरे देश को बीमार बना रही हैं इसीलिए आर्थिक सर्वे में सुझाव है फास्ट फूड की मार्केटिंग पर रोक, बच्चों के स्क्रीन टाइम पर कंट्रोल स्कूम में Physical Activity Mandatory हो।
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