International awareness day for chronic immunological and neurological diseases: आज क्रोनिक इम्यूनोलॉजिकल और न्यूरोलॉजिकल रोगों के लिए अंतर्राष्ट्रीय जागरूकता दिवस है। ये दिन दुनियाभर में अलग-अलग इम्यूनोलॉजिकल और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के बारे में जागरूकता फैलाने से जुड़ा हुआ है। ऐसे में आज हम आपको नसों से जुड़ी कुछ ऐसी बीमारियों के बारे में बताएंगे जो कि गंभीर रूप लेकर आपको परेशान कर सकती है। क्यों और कैसे, जानते हैं।
1. क्लस्टर हेडेक -Cluster Headaches
क्लस्टर हेडेक को आम भाषा में अधकपारी कहते हैं यानी कि इसमें आपके आधे सिर में दर्द होता है खास कर कि आंखों के आस पास या फिर चेहरे तक। ये सिर के किसी खास कोने में या किसी खास समय पर हो सकता है। इसके पीछे एक्सरसाइज, सामने से सीधी लाइट आंखों पर पड़ना और लाइफस्टाइल से जुड़ी कमियां हो सकती हैं। ये असल में धमनियों के फैलने और सूजन आने की वजह से हो सकता है।
2. पार्किंसंस रोग-Parkinson's Disease
पार्किंसंस रोग एक मस्तिष्क से जुड़ा विकार है जो आपके सेंट्रल नर्वस सिस्टम से जुड़ा होता है और इसकी गड़बड़ी से आपके शरीर के नसों में कंपन और कठोरता आ जाती है। इससे शरीर में संतुलन और समन्वय की कमी होने लगती है। इसमें लक्षण आमतौर पर धीरे-धीरे शुरू होते हैं और समय के साथ बिगड़ते जाते हैं। जैसे कि हाथों में कपकपाहट और शरीर की चाल का धीमा हो जाना। इसमें जैसे-जैसे रोग बढ़ता है, लोगों को चलने और बात करने में कठिनाई हो सकती है।
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3. मेनिनजाइटिस-Meningitis
मेनिनजाइटिस नसों की एक ऐसी बीमारी है जिसमें कि मेनिन्जेस में सूजन आ जाती है। असल में ये ब्रेन के अंदर मिलने वाली झिल्लियां हैं जो मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को घेरे रहती हैं। सूजन आमतौर पर मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के आसपास के तरल पदार्थ के संक्रमण के कारण होती है।
4. मिर्गी-Epilepsy
मिर्गी मस्तिष्क से जुड़ी एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जिसमें व्यक्ति को बार-बार दौरे आ सकते हैं। ये कई कारणों से हो सकता है जो मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाओं के बीच सामान्य कनेक्शन को बाधित करता है, दौरे का कारण बन सकता है। इसमें तेज बुखार, बीपी की दिक्कत, शराब या नशीली दवाओं के कारण या फिर ब्रेन स्ट्रोक की वजह से भी हो सकता है।
5. अल्जाइमर रोग-Alzheimer's Disease
अल्जाइमर रोग आपके ब्रेन सेल्स में आने वाले बदलावों की वजह से हो सकता है। इसमें फाइबर तंत्रिका कोशिकाओं के भीतर उलझ जाता है। इसके अलावा इन बीमारी की एक वजह ये भी है कि इसमें एसिट्लोक्लिन, नोरेपीनेफ्राइन, सेरोटोनिन और सोमैटोस्टैटिन जैसी गतिविधियां प्रभावित हो जाती हैं। तो, इन तमाम रोगों के बारे में जानें और फिर इसने प्रति सतर्क रहें।
(ये आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है, किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें)
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