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प्रतीक यादव को था लंग्स में क्लॉट, क्या लंग्स में इंफेक्शन किसी की अचानक से जान ले सकता है, डॉक्टर ने बताया

Prateek Yadav Death Cause: अपर्णा यादव के पति और मुलायम सिंह के छोटे बेटे प्रतीक यादव की मौत का कारण स्पष्ट नहीं है लेकिन प्रतीक को लंग्स में क्लॉट की समस्या हो रही थी। जिसका इलाज चल रहा है, लेकिन सवाल कि क्या फेफड़ों में धक्का या इंफेक्शन किसी की जान ले सकता है। डॉक्टर से जानते हैं।

प्रतीक यादव को था लंग्स में क्लॉट- India TV Hindi
Image Source : MAGNIFIC प्रतीक यादव को था लंग्स में क्लॉट

मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव की मौत की गुत्थी काफी उलझी हुई लग रही है। कहा जा रहा है कि प्रतीक लंबे समय से डिप्रेशन में थे। उन्हें लंग्स में क्लॉट था जिसका इलाज मेदांता अस्पताल में चल रहा था। हालांकि प्रतीक यादव की मौत की असल वजह क्या है ये पोस्टमार्टम की डिटेल रिपोर्ट और बिसरा जांच के बाद ही पता चलेगा। इस बारे में हमने डॉक्टर से जानने की कोशिश की क्या लंग्स में क्लॉट या इंफेक्शन होने पर किसी की अचानक मौत हो सकती है। क्या फेफड़ों का संक्रमण किसी की जान ले सकते हैं। आइये डॉक्टर से जानते हैं।

प्रतीक यादव की मौत, फेफड़ों में क्लॉट था

डॉक्टर गुरमीत सिंह छाबड़ा (निदेशक पल्मोनोलॉजी, यथार्थ हॉस्पिटल, सेक्टर 20, फ़रीदाबाद) ने बताया कि लंग्स में इंफेक्शन किसी की अचानक जान ले सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि इंफेक्शन किससे है और कितना गंभीर है। कुछ ऐसे बैक्टीरिया होते हैं जो कि बहुत ही तेजी से बढ़ जाते हैं, फैल जाते हैं। खासकर उन मरीजों में जिनका इम्यून सिस्टम पहले से ही कमजोर हो। अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं और ब्लड शुगर कंट्रोल नहीं है या कोई पुराने किडनी के CKD के मरीज है और CLD के मरीज हैं जिनका लिवर खराब चल रहा है या फिर जिनको COPD है। फेफड़े कमजोर हैं पहले से ही लंग्स का डिफेंस सिस्टम कमजोर है। ऐसे में शरीर का डिफेंस सिस्टम यानि बीमारी से लड़ने का तंत्र भी कमजोर हो जाता है। तो ऐसे मरीज का जब इम्यून सिस्टम वीक हो जाता है तो इंफेक्शन बहुत तेजी से फैलता है। देखा जाता है कि कुछ ही घंटों में pneumonia बहुत ही जल्दी बढ़ता है और जब बढ़ता है तो वो इंफेक्शन फिर पूरे शरीर में में फैल जाता है। 

कितना गंभीर है फेफड़ों का इंफेक्शन

इससे शरीर के बाकी अंगों पर भी असर होता है। ऐसी स्थिति में मरीज का ब्लड प्रेशर कम होने लग जाता है। मरीज सेप्टिक शॉक में चला जाता है और बाकी के अंग फिर काम करना बंद कर देते हैं और इससे मरीज की मौत हो सकती है। रेस्पिरेटरी फेलियर का मतलब है कि ऑक्सीजन की कमी हो गई और खून में कार्बनडाईऑक्साइड बढ़ना शुरू हो गई, बॉडी का pH कम हो गया। मरीज को सांस की मशीन पर या फिर वेंटिलेटर पर डालना पड़ गया। 

क्या लंग इंफेक्शन से मौत हो सकती है?

अगर किसी को इंफेक्शन है किसी को कोई TB है या फंगल इंफेक्शन है। किसी तरह का निमोनिया है जो कि बिल्कुल फेफड़े की जो झिल्ली होती है उसके बाहर एकदम उसको छू रही है या किसी जो मेन ट्यूब होती है सांस की उसको छू रही है तो इंफेक्शन से झिल्ली फट जाती है। ये छिल्ली फटने से एकदम छाती में हवा भर जाती है। उसको pneumothorax बोलते हैं। अगर समय पर इस हवा को तुरंत नहीं निकाला गया तो उससे भी एकदम किसी की मौत हो सकती है। खासकर जब मरीज वेंटिलेटर पर है तो किसी को हम बाहर से सांस दे रहे हो तो उसमें तो फिर वो हमें हवा निकालनी होती है वरना वो घातक हो सकती है।

फेफड़ों में क्लॉट होन से मौत हो सकती है? 

गंभीर रूप से बीमार मरीजों में खून के थक्के बनने का खतरा भी बढ़ जाता है। लंबे समय तक बिस्तर पर रहने, शरीर में सूजन, कम ऑक्सीजन और कम गतिविधि के कारण पैरों की नसों में क्लॉट बन सकते हैं। जब यह क्लॉट टूटकर फेफड़ों तक पहुंचता है, तो इसे पल्मोनरी एम्बोलिज्म कहा जाता है। यह एक अत्यंत गंभीर स्थिति है और अचानक मौत का कारण बन सकती है। हालांकि हर इंफेक्शन तुरंत मौत का कारण नहीं बनता, लेकिन कुछ स्थितियां अचानक जानलेवा हो सकती हैं। जैसे हार्ट अटैक, पल्मोनरी एम्बोलिज्म, न्यूमोथोरैक्स या तेजी से फैलता हुआ संक्रमण, जिसमें मरीज सेप्टिक शॉक में चला जाता है।

फेफड़ों के इंफेक्शन को गंभीरता से लें

ऐसे मरीज में डॉक्टर प्रोटोकॉल और गाइडलाइंस के अनुसार एंटीबायोटिक कवरेज शुरू करते हैं, लेकिन यदि संक्रमण उस दवा से नियंत्रित नहीं होता, तो संक्रमण को फैलने का अवसर मिल सकता है। इसीलिए निमोनिया और गंभीर संक्रमण वाले मरीजों को 2 से 3 दिनों तक लगातार मॉनिटर किया जाता है। डॉक्टर यह देखते हैं कि संक्रमण कम हो रहा है या नहीं। इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण पैरामीटर्स जैसे प्रोकैल्सीटोनिन (Procalcitonin), CRP और अन्य जांचें नियमित रूप से की जाती हैं, ताकि यह पता चल सके कि संक्रमण नियंत्रण में आ रहा है या नहीं।

 

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