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फोन का फबिंग ट्रेंड बना रहा घातक, बिगड़ रही है बच्चों की मेंटल हेल्थ, जानिए इससे कैसे बचें

Mobile Side Effects For Kids: मोबाइन फोन का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों की मेंटल और फिजिकल हेल्थ बिगाड़ने का काम कर रहा है। इससे बच्चों में फबिंग, चिड़चिड़ापन,अकेलापन और एग्रेशन बढ़ रहा है। आइये जानते हैं फोन को स्मार्ट करने के तरीके और रामदेव से जानिए इससे बचने के उपाय।

फबिंग क्या है- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK फबिंग क्या है

आजकल तो बिना मोबाइल के बच्चों को पालना लोगों को एक टास्क जैसा लगने लगा है। सेलफोन के बिना ना बच्चे रह पा रहे हैं और ना ही बड़े। युवा हो या अडल्ट भीड़ में होकर भी मोबाइल के साथ वो तन्हा हैं। घर में रहकर दोस्तों के ग्रुप में भी उनकी अपनी ही दुनिया बन जाती है। इतना ही नहीं बच्चे हो या बड़े जब वो मोबाइल से चिपके होते हैं उस वक्त उनसे बात भी करो तो ऐसे इग्नोर करते हैं, जैसे सुना ही नहीं है। क्योंकि वो फबिंग (phubbing) कर रहे होते हैं यानि उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने किसी की बात पर ध्यान दिया तो स्क्रीन से उनका कंटेट मिस हो जाएगा। सबसे ज़्यादा सोशल मीडिया सर्फ करते और वीडियो गेम्स खेलते हुए ये फबिंग होती हैं। जो धीरे धीरे टीनएजर्स की सोशल लाइफ सीमित कर देती है, क्योंकि उन्हें स्क्रीन की दुनिया के बाहर कुछ नज़र ही नहीं आता। बच्चों की फिज़िकल-मेंटल ग्रोथ पर ब्रेक लग जाती है। 

इसी का नतीजा है कि बच्चों में ऑटिज़्म जैसा घातक रोग हेल्थ एक्सपर्ट से लेकर पेरेंट्स तक के लिए एक चैलेंज बनता जा रहा है। इस बीमारी की गिरफ्त में आए बच्चों की परवरिश बाकी नॉर्मल बच्चों जैसी नहीं होती। वो इसलिए क्योंकि ऐसे बच्चे ना तो ठीक से बोल-समझ पाते हैं और ना ही नई नई चीज़े सीखने में वो दूसरो की तरफ शार्प होते हैं और ना ही वो घरवालों से और बाहरवालों से अच्छे से कम्युनिकेट कर पाते हैं। यही वजह है कि कई देश फोन के इस्तेमाल को लेकर सख्ती अपना रहे हैं। हाल ही में आयरलैंड के एक शहर में 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए 'नो फोन कोड' लागू किया गया है।

बच्चों के लिए फोन पर पाबंदी

अपने देश में कर्नाटक में भी तो 16 साल से कम उम्र के स्टूडेंट्स के मोबाइल यूज़ करने पर पाबंदी की तैयारी चल रही है। एक शहर, एक राज्य को नहीं बल्कि पूरे देश में ये कदम उठाए जाने चाहिए। नो फोन कोड को लेकर मुहिम चलनी चाहिए। 

फबिंग के साइड इफेक्ट्स

  • बच्चों की फिजिकल ग्रोथ पर ब्रेक लग जाता है।
  • बच्चों की मेंटल हेल्थ पर बुरा असर होता है।
  • बच्चे कहीं ज्यादा गुस्सैल-चिड़चिड़े हो जाते हैं।
  • बड़ों का सोशल सर्किल खत्म हो जाता है।
  • बड़े लोग ठीक से फोकस नहीं कर पाते।
  • डिप्रेशन की गिरफ्त में आ जाते हैं।

वर्चुअल ऑटिज्म के लक्षण पहचानें

  • पढ़ाई में दिक्कत
  • बोलने में परेशानी
  • आई कॉन्टेक्ट दिक्कत
  • दूसरो से अलग रहना
  • भीड़भाड़ में परेशानी
  • चिड़चिड़ापन महसूस होना

मेंटल हेल्थ के दुश्मन 

  • सिज़ोफ्रेनिया
  • अल्ज़ाइमर
  • पार्किंसन
  • डिमेंशिया
  • ऑटिज़्म
  • घरेलू हिंसा

बच्चों का डाइट चार्ट 

  • दिन में 1 कटोरी दाल जरूरी 
  • दिन में 2 कटोरी सब्जी लें 
  • 1 कटोरी फल जरूर दें
  • 500 ml दूध और अन्य डेयरी प्रोडक्ट जरूरी 

मेमोरी कैसे बढ़ाएं

  • 5 बादाम, 5 अखरोट पानी में भिगोएं
  • अच्छे से पीसकर ब्राह्मी मिलाएं
  • शंखपुष्पी,ज्योतिषमति डालकर पीएं

फ़िज़िकल ग्रोथ 

  • आंवला-एलोवेरा जूस 
  • दूध के साथ शतावर 
  • दूध के साथ खजूर

बच्चों के लिए सुपरफूड 

  • दूध
  • ड्राई फ्रूट
  • ओट्स
  • बींस
  • मसूर की दाल
  • शकरकंद 

ब्रेन होगा शार्प 

  • ब्राह्मी
  • शंखपुष्पी
  • अश्वगंधा

 

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