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Hindi News भारत राष्ट्रीय किसान कानू्न का विरोध क्यों कर रही है AAP? 2017 में खुद किसानों से किया था यही वादा

किसान कानू्न का विरोध क्यों कर रही है AAP? 2017 में खुद किसानों से किया था यही वादा

इंडिया टीवी को आम आदमी पार्टी का 2017 में पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए जारी घोषणा पत्र मिला है और आम आदमी पार्टी ने अपने उस घोषणा पत्र में यह वादा भी किया था कि कृषि उपज मंडी एक्ट (APMC Act) में सुधार किया जाएगा ताकि किसान अपनी उपज अपनी मर्जी के खरीदारों को राज्य के बाहर भी बेच सकें।

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नई दिल्ली: किसान कानून के विरोध में दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) लगातार प्रदर्शन कर रही है और खुद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल कह रहे हैं कि वह किसानों के साथ खड़े हैं और केंद्र के कानून के खिलाफ है। हालांकि दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने न सिर्फ दिल्ली में केंद्र के कानून को लागू कर दिया है बल्कि 2017 के पंजाब विधानसभा चुनावों के दौरान भी आम आदमी पार्टी ने किसानों को ऐसे ही कानून बनाने का वादा किया था।

इंडिया टीवी को आम आदमी पार्टी का 2017 में पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए जारी घोषणा पत्र मिला है और आम आदमी पार्टी ने अपने उस घोषणा पत्र में यह वादा भी किया था कि कृषि उपज मंडी एक्ट (APMC Act) में सुधार किया जाएगा ताकि किसान अपनी उपज अपनी मर्जी के खरीदारों को राज्य के बाहर भी बेच सकें। घोषणा पत्र में आम आदमी पार्टी ने साफ तौर पर लिखा है कि पंजाब के हर जिले जहां पर किसान अपनी उपज बेचते हैं, वहां पर मंडियों में प्राइवेट निवेश किया जाएगा ताकि ग्रामीण आंत्रप्रेन्योर को उसी तरह का लाभ मिल सके जैसा इंडस्ट्रियल और आईटी स्टार्टअप्स को मिलता है।

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वहीं, आपको बता दें कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने तीन केंद्रीय कृषि कानूनों में से एक की अधिसूचना 23 नवंबर 2020 को जारी कर चुकी है जबकि बाकी दो अन्य पर विचार किया जा रहा है। आप ने एक बयान में कहा था, 'ये कानून पहले ही लोकसभा, राज्यसभा में पारित हो चुके हैं और राष्ट्रपति भी हस्ताक्षर कर चुके हैं। अब ये कानून पूरे देश में हैं। किसी भी राज्य के पास स्वतंत्र रूप से इन्हें लागू करने और खारिज करने की शक्ति नहीं है। मोदी सरकार ने इन्हें पारित किया है और केवल वे ही इन्हें वापस ले सकती है।'

दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) कानून, 2020 को 23 नवंबर को अधिसूचित किया गया था। उन्होंने कहा, 'बाकी दो कानूनों पर दिल्ली सरकार के विकास विभाग की तरफ से विचार किया जा रहा है।'

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