नई दिल्ली: महाराष्ट्र के सियासी ड्रामे के साथ ही भाजपा ने पिछले कुछ सालों में क्या खोया और क्या पाया, इस पर भी चर्चा तेज हो गई है। एक तरफ 2014 की भारतीय जनता पार्टी है, जब केंद्र में नयी-नयी मोदी सरकार बनी थी तब सिर्फ सात राज्य में ही बीजेपी अपने गठबंधन के साथ सत्ता में थी। ये राज्य गोवा, गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब और अरूणाचल प्रदेश थे। सिर्फ इन्हीं सात राज्यों में भगवा लहरा रहा था।
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लेकिन, जैसे-जेसे वक्त गुजरा, भगवा पार्टी का दायरा बढ़ता गया। चार साल बाद 2018 के मध्य तक 21 राज्य में बीजेपी की सरकार खड़ी हो गई। मोदी और शाह की सियासी रणनीति हर स्टेट में कामयाब होती गई। लेकिन, भगवा जनाधार का जो सूरज चढ़ा था वो अब ढलने लगा है। एक-एक कर राज्य भाजपा के हाथ से निकलने लगे हैं। स्थिती क्या आ गई है, ये ऊपर दिखाई गई तस्वीर से समझिए। 2018 में जो नक्शा भगवा-भगवा दिख रहा है, उसमे से अब भगवा रंग गायब होता जा रहा है।
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तस्वीर के एक तरफ दिसंबर 2017 की स्थिति है और दूसरा ओर नवंबर 2019 की। पूरे नक्शे के 70% इलाके पर बीजेपी का कब्जा था। ये आकंड़े राज्य में बनाई गई सत्ता के आधार पर हैं। मई 2014 के बाद मोदी और शाह का गजब का जादू था। गजब की सियासी ताकत थी। वह लगातार जीत रहे थे। 2014 में 7 राज्यों, 2015 में 13 राज्यों, 2016 में 15 राज्यों, 2017 में 19 राज्यों और 2018 में 21 राज्य पर बीजेपी ने अपने साथों दलों के साथ सरकार बना ली। लेकिन, 2019 में यह राज्यों में सरकार होने का यह आंकड़ा घटकर 16 पर पहुंच गया।
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राज्यों से भाजपा की सरकार जाने का सिलसिला पंजाब से शुरू हुआ। 2017 में पंजाब गया, फिर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान में कांग्रेस ने बीजेपी के जीत के रथ पर ब्रेक लगाया और अब महाराष्ट्र में भी भाजपा सरकार के बाहर हो गई। अब ऐसे में सबकी नजरें आने वाले झाऱखंड और दिल्ली विधानसभा चुनावों पर हैं। सवाल है कि क्या ये आकंड़ा घटेगा या बढ़ेगा।
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