India TV News Desk
Published : Aug 06, 2015 01:39 pm IST, Updated : Aug 13, 2015 11:00 pm IST
नई दिल्ली: 15 अगस्त, 1947 से पहले हमारे देश पर अंग्रेजों का शासन था और हमारे स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी अपने-अपने तरीके से अंग्रेजों के खिलाफ लड़ रहे थे। भारत की आजादी के इस आंदोलन
07 अगस्त 1906 में तिरंगे की तीन पट्टियां गहरी हरी, पीली और लाल रंग की थी और आठ सफेद कमल, सूर्य का चिन्ह और एक चांद-तारा समेत वंदे मातरम अंकित थे।
1907 में यह झंडा फ्रांस की मैडम भिखाजी कामा ने पेरिस में होने वाले एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में फहराया। यह झंडा पहले झंडे जैसा था, केवल इसमें एक सफेद कमल का फूल और सात तारे थे।
1916 मे यह झंडा मिसेज एनी बिसेंट ने फहराया। इसमें पांच लाल और चार हरी पट्टियां, सात तारे और एक कोने में छोटा यूनियन जैक झंडे का चिह्न् अंकित था।
1921 मे यह झंडा महात्मा गांधी जी ने प्रस्तुत किया। इसमें सफेद, हरी और लाल रंग की तीन पट्टियां और चरखे का चिह्न् था।
1931 में प्रस्तावित कांग्रेस झंडे का रंग केवल भगवा था। इसमे चरखे का चिह्न् अंकित था।
अगस्त 1931 में यह झंडा कांग्रेस ने अपनाया। इसमे भगवा, सफेद और हरी तीन पट्टियां और चरखे का चिह्न् था।
22 जुलाई 1947 को यह झंडा भारतीय विधान सभा ने अपनाया। इसमें चरखे के स्थान पर सम्राट अशोक का धर्म चक्र अंकित है। तब से यही हमारा राष्ट्रीय ध्वज है।