नई दिल्ली: फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म ज्यादातर युवाओं सहित बहुत लोगों की पढने और देखने की आदतों में तेजी से बदलाव कर रहे हैं। एसोचैम ने एक विश्लेषण के आधार पर यह बात कही।
235 परिवारों की प्रतिक्रिया के विश्लेषण के आधार पर इस उद्योग संगठन ने दावा किया कि बडे़ शहरों में रह रहे भारतीय अब अखबार पढने और टेलीविजन देखने में 3 से 4 साल पहले के रूख की तुलना में अब आधे से भी कम समय खर्च कर रहे हैं।
एसोचैम ने एक बयान में कहा कि यह सच है कि भारतीय अखबार उद्योग करीब 6.2 करोड़ प्रिंट ऑर्डर के साथ मजबूत बना हुआ है और आम लोग सुबह के अखबार के प्रति निष्ठावान बने हुए हैं, लेकिन सोशल मीडिया के तेजी से पैर पसारने के बीच परिवार के सदस्यों के बीच इसे पढने में खर्च होने वाले समय में तेजी से गिरावट हुई है।
चैंबर ने दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे और बेंगलुरू सहित बड़े शहरों के 235 परिवारों के जवाबों के आधार पर विश्लेषण किया गया।
एसोचैम के महासचिव डी एस रावत ने कहा कि दुर्भाग्यवश सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर कुछ असत्यापित जानकारियों के सच के रूप में प्रसार चिंता का विषय बना हुआ है। हालांकि नये मीडिया के परिपक्व होने पर आशा है कि उपयोगकर्ता इंटरनेट पर सूचनाओं को लेकर ज्यादा समझदार और सजग होंगे।
फिलहाल 6.2 करोड़ अखबार छप रहे हैं और टीवी देखने वालों की संख्या भी 78 करोड़ के आस-पास है। लेकिन बहुत सारा ट्रैफिक खासकर टीवी देखने वाले दर्शकों का स्मार्टफोन, टैब की तरफ जा रहा है, जहां नेटफ्लिक्स, यूट्यूब, अमेजन जैसे कई विकल्प हैं जो युवाओं को खासतौर से लुभा रहे हैं। फेसबुक इसमें सबसे आगे रहने का दावा करता है और भारत में उसके कुल 20 करोड़ यूजर्स हैं, जो फेसबुक के कुल यूजर्स का दसवां हिस्सा है। पूरी दुनिया में फेसबुक के 2 अरब यूजर्स हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में अभी इंटरनेट की पहुंच महज 40-45 फीसदी आबादी तक ही है। वहीं, टीवी की पहुंच 90 फीसदी आबादी तक है। लेकिन सरकार डिजिटल इंडिया अभियान चला रही है और भारत नेट के तहत गांव-गांव तक इंटरनेट पहुंचाने में जुटी है। इससे सोशल मीडिया का और विस्तार होगा तथा लोगों का खबरों, विचारों आदि तक पहुंचने का जायका बदलेगा।
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