पुलिस के मुताबिक, रविंद्र ने दिल्ली में साल 2007 में एक फिल्म देखी थी, जिसमें छोटे बच्चों के साथ यौन शोषण होते हुए दिखाया जाता था। फिल्म को देखने के बाद उसने बच्चों को शिकार बनाना शुरू किया।
रविंद्र ने सबसे पहली घटना को कांजवाला में 2008 में अंजाम दिया था। यहां उसने 5 साल की बच्ची के साथ यौन शोषण किया था। इस मामले में बच्ची के मां-बाप बहुत गरीब थे इस कारण उन्होने पुलिस में शिकायत नहीं की थी, जिससे कि रविंद्र का हौंसला बढ़ गया। और उसने एक के बाद एक 15 वारदातो को अंजाम दिया। वो ज्यादातर 10 साल तक के बच्चों को निशाना बनाता था। उन्हें लालच देकर अपने साथ ले जाता था और उनके साथ सेक्स करने के बाद उसका गला दबा देता था। उसे डर था कि उसका राज ना खुल जाए। वो 10 महीने पहले ही जमानत पर जेल से छुटा था और उसके बाद उसने बेगमपूर में एक वारदात को अंजाम दे दिया। इस घटना ने एक बाद फिर निठारी कांड की याद दिला दी।
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