नई दिल्ली: भारतीय रेल के लिए साल 2017 उथल-पुथल वाला रहा। इस साल को रेल दुर्घटनाओं के लिए याद किया जाएगा। इस साल के दौरान रेल दुर्घटनाओं के साथ ही व्यापक प्राशासनिक बदलाव भी हुए। नरेंद्र मोदी सरकार के पहले रेल मंत्री सुरेश प्रभु को लगातार रेल दुर्घटनाओं के कारण इस्तीफा देना पड़ा। इसके साथ ही रेलवे बोर्ड ने अधिकारियों को मिलने वाली कई सुविधाओं में भी कटौती की।
आइए एक नजर डालते हैं साल 2017 के बड़े रेल हादसों पर-
22 जनवरी, 2017: जगदलपुर-भुवनेश्वर हीराखंड एक्सप्रेस आंध्र प्रदेश के विजयानगरम जिले में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में 27 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि 36 घायल हो गए थे।
7 मार्च, 2017: भोपाल-उज्जैन पैसेंजर ट्रेन में बम विस्फोट हुआ। कालापीपल और सीहोर रेलवे स्टेशन के बीच जब्दी स्टेशन के पास हुई इस घटना में 8 यात्री घायल हुए थे। इस घटना के पीछे आतंकियों का हाथ बताया गया था।
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17 मार्च, 2017: बेंगलुरु के चित्रादुर्गा जिले में एक एंबुलेंस और ट्रेन की टक्कर में 4 महिलाओं की मौत हो गई थी। दुर्घटना एंबुलेंस के मानवरहित क्रॉसिंग को पार करने के दौरान हुई। एंबुलेंस का ड्राइवर एक मानवरहित क्रॉसिंग को पार करने की कोशिश कर रहा था तभी ट्रेन ने पीछे से उसे टक्कर मार दी।
30 मार्च, 2017: उत्तर प्रदेश के कुलपहाड़ स्टेशन के करीब लाडपुर और सूपा के बीच महाकौशल एक्सप्रेस पटरी से उतर गई थी। इस हादसे में करीब पांच दर्जन यात्री घायल हो गए थे। इस दुर्घटना की जांच एटीएस रेलवे पुलिस बल दोनों ने की थी।
15 अप्रैल, 2017: उत्तर प्रदेश के मेरठ से लखनऊ जा रही राज्यरानी इंटरसिटी एक्सप्रेस के 8 डिब्बे पटरी से उतर गए थे। इस हादसे में करीब 60 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।
19 अगस्त, 2017: उत्तर प्रदश के मुजफ्फरनगर जिले के खतौली के पास कलिंग उत्कल एक्सप्रेस का पटरी से उतरना इस साल की सबसे बड़ी दुर्घटना रही। ट्रेन की छह बोगियां पटरी से उतर गई थी। इसमें 23 लोगों की जानें गई थीं और 156 लोग घायल हो गए थे।
रेलवे ने इस साल क्षेत्रीय अधिकारियों को भी अधिक ताकत दी। नए रेल मंत्री पीयूष गोयल ने निर्णय लेने की क्षमता तेज करने के लिए महाप्रबंधकों और विभागीय प्रबंधकों को वित्तीय तथा प्राशासनिक क्षमताएं दी। वरिष्ठ अधिकारियों को यह ताकत भी दी गई कि वे सुरक्षा अथवा रख-रखाव के कार्यों की निगरानी के लिए 65 वर्ष तक के पुराने कर्मचारियों की फिर सेवाएं ले सकें।