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Hindi News भारत राष्ट्रीय बागेश्वर सरकार पाखंड या चमत्कार? धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दिए सभी सवालों के जवाब; Exclusive Video

बागेश्वर सरकार पाखंड या चमत्कार? धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दिए सभी सवालों के जवाब; Exclusive Video

धीरेंद्र शास्त्री की सच्चाई क्या है, जिसे उनके भक्त चमत्कार कहते हैं उसकी असलियत क्या है? इन सवालों के जवाब के लिए इंडिया टीवी बागेश्वर धाम सरकार के रहस्य लोक पहुंच गई।

Bageshwar Sarkar Exclusive: देशभर में बागेश्वर धाम सरकार के नाम की खूब चर्चा हो रही है। बागेश्वर धाम सरकार के नाम से मशहूर कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री पर आस्था वर्सेस अंधविश्वास की जंग छिड़ गई है। सवाल ये उठ रहा है कि क्या धीरेंद्र शास्त्री सचमुच लोगों के मन की बात जान लेते हैं? क्या उनके दरबार में एक अर्जी लगा देने से दुख दूर हो जाते हैं? क्या संत धीरेंद्र शास्त्री असीमित शक्तियों के स्वामी हैं? धीरेंद्र शास्त्री की सच्चाई क्या है, जिसे उनके भक्त चमत्कार कहते हैं उसकी असलियत क्या है? इन सवालों के जवाब के लिए इंडिया टीवी बागेश्वर धाम सरकार के रहस्य लोक पहुंच गई। इस दौरान अपने ऊपर हर एक आरोप और हर सवाल पर धीरेंद्र शास्त्री ने जवाब दिया।

"मैं कोई ईश्वर नहीं, तपस्या की है..."
इंडिया टीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत के दौरान बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, "अभी हम रायपुर में हैं, कोई गुस्सा नहीं है। मैं बुंदेली आदमी हूं और अनपढ़ गवार आदमी हूं। अपने ईष्ट को मानना कानूनन और मौलिक अधिकार है। भारत में कुछ दोगले लोग, वामपंथी लोग हैं। आज रायपुर में दरबार लग रहा है। दिक्कत हैं आ जाए। हम कोई ईश्वर नहीं कोई दावा नहीं करते। पेन कागज लेते हैं ध्यान करते हैं। मैंने तपस्या की, ईश्वर के ध्यान के कारण हम गुरू होने के नाते भगवान से हम प्रार्थना करते हैं।"

"बचपन से ही आभास होता था"
बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र शास्त्री ने इंडिया टीवी से आगे कहा, "अगर ये सब गलत है तो भारत के सभी सनातनी को जेल में डाल दो। ये गद्दी की परंपरा है कि हमें आभास हो जाता है। संतों का आशीर्वाद है। भारत का कोई भी पादरी मौलवी बाला जी का सामना नहीं कर सकता, ये दावे के साथ कह सकते हैं। छोटे-छोटे चमत्कार करके हिंदूओं को बहला फुसला रहे थे। हमारा फंडा सिर्फ सनातन, हमारा लॉजिक सिर्फ सनातन, सिर्फ मकसद सनातन। बचपन से हमें आभास होता था। ना कोई दावा है, ना कोई बुलावा है, गद्दी की परंपरा से नाम का आभास हो जाता है। भारतीय साधु संतों को टारगेट किया जाता है। ये धर्म को बदनाम करने अपमान करने की साजिश है।"

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