आज सूर्यास्त के साथ ही 77वें गणतंत्र दिवस समारोह का समापन हो गया। रायसीना हिल्स आज एक बार फिर ऐतिहासिक बीटिंग रिट्रीट का गवाह बना। सेनाओं की एकता, अनुशासन और गौरव के प्रतीक इस समारोह के दौरान विजय चौक का इलाका मनमोहक भारतीय धुनों से गूंज उठा। इसके साथ ही गणतंत्र दिवस के 4 दिन तक चलने वाले कार्यक्रमों का समापन हो गया। समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित अन्य केंद्रीय मंत्री और आम जनता मौजूद रहे।
क्या है बीटिंग रिट्रीट?
बता दें कि बीटिंग रिट्रीट भारत में गणतंत्र दिवस समारोह के समापन का प्रतीक है। यह समारोह गणतंत्र दिवस के तीन दिन बाद, 29 जनवरी की शाम को नई दिल्ली के विजय चौक पर आयोजित किया जाता है। इस समारोह में भारतीय सेना, नौसेना, वायु सेना, दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के बैंड म्यूजिकल परफॉर्मेंस देते हैं। इस समारोह की अध्यक्षता भारत के राष्ट्रपति करते हैं, जो सशस्त्र बलों के सुप्रीम कमांडर होते हैं।
Image Source : ptiबीटिंग रिट्रीट सेरेमनी
क्यों होती है बीटिंग रिट्रीट?
बीटिंग रिट्रीट सेना की बैरक वापसी का प्रतीक है। इस समारोह में भारत के राष्ट्रपति चीफ गेस्ट होते हैं। राष्ट्रपति के आते ही उन्हें नेशनल सैल्यूट देकर राष्ट्रगान शुरू होता है, तिरंगा फहराया जाता है। इसके बाद तीनों सेनाओं के बैंड मिलकर पारंपरिक धुन के साथ मार्च करते हैं। तीनों सेनाओं के बैंड वादन के बाद रिट्रीट का बिगुल बजता है। इसके बाद बैंड मास्टर राष्ट्रपति के पास जाते हैं और बैंड वापस ले जाने की इजाजत मांगते हैं।
ब्रिटेन, कनाडा में भी होती है बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी
भारत में बीटिंग रिट्रीट समारोह पहली बार 1950 के दशक में महारानी एलिजाबेथ और प्रिंस फिलिप की राजकीय यात्रा के दौरान आयोजित किया गया था। तब से, यह समारोह भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता और बलिदान को श्रद्धांजलि देने के लिए एक सालाना कार्यक्रम बन गया है। भारत के अलावा ब्रिटेन, कनाडा, अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी होती है।
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