CBSE Three Language Policy: सुप्रीम कोर्ट में CBSE के कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए 3 भाषाओं के अनिवार्य नियम को चुनौती दी गई है। चुनौती देने वाली इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट में दायर इस जनहित याचिका में CBSE की नई नीति को चुनौती दी गई है, जिसके तहत कक्षा 9वीं में 2 और भाषाएं अनिवार्य कर दी गई हैं। जानें ये पूरा मामला क्या है।
स्टूडेंट अचानक कैसे सीखेंगे भाषाएं?
बता दें कि याचिकाकर्ता के वकील मुकुल रोहतगी ने आज (शुक्रवार को) सुप्रीम कोर्ट के सामने ये मामला रखा। उन्होंने कहा कि स्टूडेंट अचानक ये भाषाएं सीखकर 10वीं की परीक्षा कैसे दे सकते हैं? इससे अराजकता फैल जाएगी।
अगले हफ्ते होगी मामले की सुनवाई
इस पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने कहा कि हम इसे अगले सप्ताह सूचीबद्ध करेंगे। जान लें कि यह अपील वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मौखिक उल्लेख के माध्यम से की। मुकुल रोहतगी ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह याचिका देशभर के तमाम स्टूडेंट्स, टीचर्स और अभिभावकों की तरफ से दाखिल की गई है।
याचिका में अराजकता फैलने की आशंका का जिक्र
मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, 'यह CBSE की नई पॉलिसी को चुनौती देने वाली जनहित याचिका है। इसके अंतर्गत कक्षा 9 में 2 अतिरिक्त भाषाएं अनिवार्य की गई हैं। कोई छात्रा-छात्रा क्लास 9 में नई भाषा को कैसे सीखेगा और फिर क्लास 10 में उसकी परीक्षा देगा? इससे अराजकता फैल सकती है। कृपया इस मामले को आगामी सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करें।'
CBSE की नई पॉलिसी पर सवाल
याचिका के मुताबिक, CBSE की इस नई पॉलिसी से स्टूडेंट्स पर अतिरिक्त शैक्षणिक बोझ पड़ेगा और खासतौर से उन स्टूडेंट्स के लिए परेशानी पैदा होगी, जिन्हें अचानक नई भाषा को सीखना होगा। अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते सुनवाई करेगा।
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