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Hindi News भारत राष्ट्रीय 'सोनम वांगचुक को रिहा नहीं कर सकते', केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दी सूचना, जानें क्या दलील दी

'सोनम वांगचुक को रिहा नहीं कर सकते', केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दी सूचना, जानें क्या दलील दी

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में साफ कर दिया है कि वह लेह हिंसा मामले में हिरासत में लिए गए जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को रिहा नहीं कर सकती। आइए जानते हैं कि सरकार ने इस बारे में क्या दलील दी है।

Sonam Wangchuk Supreme Court- India TV Hindi Image Source : PTI सोनम वांगचुक की रिहाई पर सुनवाई।

केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचना दी है कि लद्दाख से संबंधित जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को रिहा नहीं किया जा सकता है। बता दें कि बीते साल लेह में हिंसक प्रदर्शनों को लेकर सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम यानी NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। सोनम वांगचुक को बीते साल 26 सितंबर को हिरासत में लिया गया था। हाल ही में वांगचुक की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए चिकित्सा आधार पर उनकी रिहाई की मांग की जा रही है। आइए जानते हैं कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को इस बारे में दिए गए जवाब में क्या दलील दी है।

सरकार ने क्या दलील दी?

भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की पीठ के सामने सुप्रीम कोर्ट के उस पूर्व प्रश्न का उत्तर दिया है, जिसमें अधिकारियों से वांगचुक की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए मेडिकल आधार पर उनकी रिहाई पर विचार करने को कहा गया था। तुषार मेहता ने कहा- "जेल मैनुअल के अनुसार सोनम वांगचुक की करीब 24 बार नियमित रूप से जांच की गई है। वे स्वस्थ और तंदुरुस्त हैं। उन्हें पाचन संबंधी समस्या और इंफेक्शन था। यदि हम (उनकी रिहाई के लिए) ऐसे अपवाद बनाने लगते हैं, तो इसका कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकलेगा। जिन आधारों पर हिरासत आदेश पारित किया गया था, वे अभी भी लागू हैं। स्वास्थ्य कारणों से उनकी रिहाई संभव नहीं होगी। यह वांछनीय भी नहीं हो सकता है। चूंकि यह मामला आपके समक्ष आया है, इसलिए हमने इस पर पूरा विचार किया है।”

 

सोनम वांगचुक पर क्या आरोप है?

सोनम वांगचुक वर्तमान समय में जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं। उन्हें 26 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था। इससे दो दिन पहले लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों में चार लोग मारे गए थे और 150 से अधिक घायल हो गए थे। सोनम वांगचुक पर इस हिंसा को भड़काने का आरोप लगा है।

वांगचुक पर GEN-Z को उकसाने की कोशिश का आरोप

केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के प्रशासन ने इस मामले लेकर सुप्रीम कोर्ट में जानकारी दी है कि जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने नेपाल और बांग्लादेश की तरह विरोध प्रदर्शन के लिए 'GEN-Z' को उकसाने की कोशिश की थी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में जानकारी दी थी कि वांगचुक ने 'अरब स्प्रिंग' जैसे आंदोलन का भी जिक्र किया था। इस आंदोलन के कारण अरब जगत के कई देशों में सरकारें गिर गई थीं।

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