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Hindi News भारत राष्ट्रीय खाइये "धोखा" और "दर्द" हो जाएगा कम, न रहेगी चिंता न रहेगा गम...80 वर्षों में मिली सफलता

खाइये "धोखा" और "दर्द" हो जाएगा कम, न रहेगी चिंता न रहेगा गम...80 वर्षों में मिली सफलता

New Pain Relief Techniques: अगर आप किसी तरह के दर्द से परेशान हैं तो इसके लिए अब दर्द निवारक दवाएं खाने की जरूरत नहीं है, बल्कि "धोखा" खाइये। इससे आपका दर्द पूरी तरह कम हो जाएगा। इसके बाद सभी प्रकार की चिंताओं और गम से भी मुक्त हो जाएंगे। आपको सुनकर यह अजीब लग रहा होगा कि यह कौन से फिजूल की बातें हैं?.

प्रतीकात्मक फोटो- India TV Hindi Image Source : PTI प्रतीकात्मक फोटो

New Pain Relief Techniques: अगर आप किसी तरह के दर्द से परेशान हैं तो इसके लिए अब दर्द निवारक दवाएं खाने की जरूरत नहीं है, बल्कि "धोखा" खाइये। इससे आपका दर्द पूरी तरह कम हो जाएगा। इसके बाद आप सभी प्रकार की चिंताओं और गम से भी मुक्त हो जाएंगे। आपको यह सुनकर अजीब लग रहा होगा कि ये कौन सी फिजूल की बातें हैं?...आखिर धोखा खाने से किसी का दर्द कैसे कम हो सकता है?... मगर यह सच है। दरअसल वैज्ञानिकों ने दिमाग को धोखा देकर दर्द कम करने वाली नई तकनीकि की खोज की है, जिसमें धोखा देने से दर्द से घटने लगता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार दिमाग को चकमा देकर यह सोचने के लिए बाध्य किया जाए कि प्लेसीबो (मानसिक रूप से दर्द से राहत) दर्द कम करने में मदद करेगा? संकेत अच्छे हैं। दर्द एक संवेदनात्मक अनुभव से अधिक है। यह एक आंतरिक प्रणाली है जो स्वयं को बचाए रखने से जुड़ी है। जब दिमाग धोखा खाता है तो दर्द कम होने लगता है। इसमें हमें सुरक्षित रखने की ताकत और यह सिखाने की क्षमता होती है कि अपने आसपास की दुनिया में हमें कैसे तालमेल बिठाना है। यह एक गर्म चूल्हे को छूने का पहला अनुभव है जो हमें रसोई में सावधान रखता है, एक चोट से ठीक होने की पहली शुरुआत जो हमें मदद के लिए डॉक्टरों के पास ले जाती है और हमें भविष्य के नुकसान के लिए रणनीति सीखने में मदद करता है। दर्द संवेदना से अधिक है, लेकिन इसमें भावनात्मक और संज्ञानात्मक घटक भी शामिल हैं।

मस्तिष्क को धोखा देकर दर्द और गम मिटाना संभव
वैज्ञानिकों के अनुसार मस्तिष्क को धोखा देकर दर्द और गम को मिटाना पूरी तरह संभव है। प्लेसीबो एक प्रक्रिया है। हालांकि कभी-कभी यह दवा भी हो सकती है। इसके जरिये दिमाग को धोखा देकर मरीज को फायदा पहुंचाया जा सकता है। दर्द के ये असंख्य आयाम न केवल इसके अनूठे व्यक्तिपरक अनुभव को जन्म देते हैं बल्कि प्लेसीबो प्रभाव उत्पन्न करने से शोधकर्ताओं और डॉक्टरों को भी मदद मिलती है। दर्द के संबंध में प्लेसीबो एनाल्जेसिया तब होता है जब मस्तिष्क को यह सोचने के लिए ‘‘धोखा’’ दिया जाता है कि एक निष्क्रिय पदार्थ दर्द को कम करने के लिए काम करेगा, और करता है।

दर्द निवारक दवाओं के बगैर कम होगा दर्द
वैज्ञानिकों के अनुसार वास्तविक दर्द निवारक दवाओं का उपयोग किए बिना दर्द को कम किया जा सकता है। इस दृष्टिकोण के तहत करीब 80 वर्षों से बड़े पैमाने पर शोध किया गया है। इसका प्रभाव पहली बार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान देखा गया था। विवरण पर विवाद हो सकता है लेकिन प्लेसीबो प्रभाव की खोज तब की गई जब अमेरिकी डॉक्टर हेनरी बीचर के पास घायल सैनिकों का इलाज करने के लिए मॉर्फिन नहीं था, इसके बजाय उन्होंने एक स्लाइन दिया। घायलों को यह बताने के बाद कि स्लाइन वास्तव में मॉर्फिन था और इसे एक समान तरीके से देते हुए उन्होंने पाया कि कुछ सैनिकों ने दर्द के लक्षणों में कमी की सूचना दी। प्लेसीबो प्रभावों का अब व्यापक रूप से विभिन्न प्रकार की दशा में अध्ययन किया गया है, जिसमें उनकी संभावित क्लीनिकल ​​उपयोगिता पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्लेसीबो शोध में पहली सफलता मनोविज्ञान के क्षेत्र से मिली, जहां यह दिखाया गया कि प्लेसीबो एनाल्जेसिया मुख्य रूप से क्लासिकल कंडीशनिंग और सुधार की अपेक्षाओं के संयोजन के माध्यम से बनता है। जर्मन शोधकर्ता लिवेन शेंक और उनके सहयोगियों की 2019 की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि एक मरीज, जिसने किसी को दर्द निवारक क्रीम लगाते हुए देखा है जब प्लेसीबो क्रीम उसे दी जाती है, तो उसे राहत का अनुभव होगा।

इस तरीके से भी दर्द हो सकता है कम
मानव मस्तिष्क इमेजिंग अध्ययनों ने प्लेसीबो प्रतिक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद की है। अधिकतर क्लीनिक में प्लेसीबो पहले से मौजूद हैं, जो नियमित चिकित्सा उपचारों की प्रभावशीलता का समर्थन करने के लिए काम कर रहे हैं। इसी तरह सम्मोहन के जरिए भी दर्द से राहत मिल सकती है। अब इसे मिथक नहीं कहा जा सकता है। दर्द, आखिरकार, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के विभिन्न भागों द्वारा निर्मित एक समग्र अनुभव है, न कि केवल ऊतक क्षति का परिणाम। मनोवैज्ञानिक तकनीकें और हस्तक्षेप जो मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में गतिविधि को संशोधित करते हैं, दर्द की धारणा को बदल सकते हैं। क्लीनिकल ​​सम्मोहन सत्र के दौरान एक प्रशिक्षित पेशेवर उच्च आंतरिक एकाग्रता (आत्‍म-विस्‍मृति, जिसमें व्‍यक्ति को पता नहीं चलता कि उसके चारों ओर क्‍या हो रहा है) जैसी स्थिति में लाता है और फिर रोगी को बेहतर भावनात्मक या शारीरिक कल्याण के लिए सुझावों के माध्यम से मदद करता है। वैज्ञानिकों को लंबे समय से पता है कि सम्मोहन दर्द को कम करने में प्रभावी है।

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