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भारत के इस राज्य में है करोड़पतियों का एकलौता गांव, यहां हर आदमी के पास है बेशुमार दौलत

भारत का एकलौता करोड़पतियों का यह गांव महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में है। इस गांव का नाम है हिवरे बाजार (Hiware Bazar Village)। हालांकि, इस गांव में रहने वाले लोगों की पहले ऐसी स्थिति नहीं थी।

Millionaire Village hiware bazar- India TV Hindi Image Source : FILE PHOTO Millionaire Village hiware bazar

Highlights

  • भारत के इस राज्य में है करोड़पतियों का एकलौता गांव
  • यहां हर आदमी के पास है बेशुमार दौलत
  • गांव में एक भी मच्छर नहीं

अभी हाल ही में हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट जारी की गई थी, जिसमें बताया गया था कि भारत की स्थिति हंगर इंडेक्स में पाकिस्तान से भी बदतर है। हालांकि, इससे इतर हम आपको बता दें कि भारत में एक ऐसा गांव हैं, जहां रहने वाला हर आदमी करोड़पति है। सबसे बड़ी बात की हम यहां भारत के बड़े शहरों जैसे मुंबई, दिल्ली और कोलकाता की बात नहीं कर रहे हैं। बल्कि हम बात कर रहे हैं भारत के एक गांव की जिसके बारे में शायद बहुत से लोग नहीं जानते हैं।

महाराष्ट्र में है ये गांव

भारत का एकलौता करोड़पतियों का यह गांव महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में है। इस गांव का नाम है हिवरे बाजार (Hiware Bazar Village)। हालांकि, इस गांव में रहने वाले लोगों की पहले ऐसी स्थिति नहीं थी। 1990 में यहां रहने वाले लोगों की स्थिति बेहद खराब थी। उस वक्त यहां के ज्यादातर परिवार गरीब किसान थे। इस गरीबी का सबसे बड़ा कारण यह था कि इस गांव में पानी का कोई सोर्स नहीं था। लेकिन अब इन गांव वालों की किस्मत बदल गई है और यहां रहने वाले लगभग 305 परिवारों में से 80 फीसदी से ज्यादा लोग करोड़पति हैं। 

गांव में एक भी मच्छर नहीं

अमीरी के साथ-साथ इस गांव में साफ सफाई का भी पूरा ख्याल रखा जाता है। इस वजह से इस गांव में एक भी मच्छर नहीं है। इस गांव में ना तो पीने के पानी की कमी है और ना ही हरियाली की। सबसे अच्छी बात यह है कि इस गांव में आस-पास के गांवों के मुकाबले गर्मी भी कम होती है। इस गांव में रहने वाले 50 से ज्यादा परिवारों की वार्षिक आय 10 लाख रुपए से ज्यादा है। 

सिर्फ तीन परिवार गरीबी रेखा के नीचे हैं

इस गांव में गरीबी की बात करें तो यहां सिर्फ तीन ऐसे परिवार हैं, जो गरीबी रेखा के नीचे हैं। लेकिन साल 1995 में यहां करीब 168 परिवार गरीबी रेखा के नीचे थे। बाद में जब 1998 में यह सर्वेक्षण किया गया तो पता चला की इन परिवारों की संख्या अब गिर कर 53 हो गई है। वहीं वर्तमान की बात करें तो यहां सिर्फ तीन ही परिवार ऐसे हैं, जो गरीबी रेखा के नीचे हैं।

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