Rajat Sharma's Blog | गालियां देने के लिए सबूत की ज़रूरत नहीं होती
राहुल ने जो इल्जाम लगाए, उनका कोई ठोस आधार नहीं था, उनके पास कोई सबूत नहीं थे। जो उन्होंने कहा वो लोकसभा की रूल बुक के खिलाफ था। इसलिए उनके भाषण के आपत्तिजनक अंशों को संसद की कार्यवाही से हटा दिया गया।
राहुल गांधी ने एक बार फिर संसद की गरिमा पर चोट की, फिर संसद में बहस का स्तर गिरा दिया, बजट पर बहस की आड़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को खराब करने के लिए बेसिरपैर की बातें कहीं। राहुल गांधी ने कहा, मोदी ने अमेरिका के हाथों देश को बेच दिया है, मोदी की गर्दन अमेरिका ने दबा रखी है, मोदी ने देशहित का सौदा कर लिया। इसके बाद राहुल गांधी ने एपस्टीन फाइल का जिक्र किया, कहा कि एपस्टीन फाइल में केन्द्रीय मंत्री हरदीप पुरी का नाम है, इसलिए मोदी अमेरिका से डर गए।
राहुल ने जो इल्जाम लगाए, उनका कोई ठोस आधार नहीं था, उनके पास कोई सबूत नहीं थे। जो उन्होंने कहा वो लोकसभा की रूल बुक के खिलाफ था। इसलिए उनके भाषण के आपत्तिजनक अंशों को संसद की कार्यवाही से हटा दिया गया। राहुल गांधी भी जानते हैं कि उन्होंने जो इल्जाम लगाए हैं, उन्हें साबित करना मुश्किल होगा। इसके बाद भी उन्होंने ये हरकत क्यों की? उनका इरादा क्या था? राहुल गांधी ने दुनिया भर में बदनाम sex offender, child sex trafficker जेफरी एपस्टीन का नाम लेकर कहा कि अमेरिका के न्याय विभाग ने एपस्टीन से जुड़ी जो लगभग 30 लाख फाइल्स जारी की हैं, उनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और उद्योगपति अनिल अंबानी का भी नाम है, इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डरे हुए हैं।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि जिस एपस्टीन फाइल में उनका नाम आया है, वो नवंबर 2014 की है। उस वक़्त वो सरकारी सेवा से रिटायर हो चुके थे और इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट के लिए काम कर रहे थे। हरदीप पुरी ने कहा कि जिस फाइल में उनका नाम आया है, वो एक e-mail है, जो उन्होंने सोशल नेटवर्किंग साइट linkedin के संस्थापक को लिखी थी। उसमें ये कहा था कि मोदी के आने के बाद से भारत की इंटरनेट अर्थव्यवस्था बड़ी तेज़ी से बढ रही है, इसलिए linkedin को भारत में पूंजी लगानी चाहिए, इसमें क्या ग़लत है?
हरदीप पुरी ने कहा कि वह 2009 में अमेरिका गए थे और क़रीब आठ साल रहे, इस दौरान वह तीन-चार बार जेफरी एपस्टीन से मिले थे लेकिन, ये कोई वन-टू-वन मुलाक़ात नहीं थी, राहुल गांधी को एपस्टीन केस के दूसरे आरोपियों और उनका नाम आने के बीच का फ़र्क़ समझना चाहिए। राहुल गांधी जब भी कोई इल्जाम लगाते हैं, वो टिक नहीं पाते। इसकी वजह है कि वो बिना सबूत के, बिना ठोस दस्तावेज के इल्जाम लगाते हैं और अपनी बात कभी साबित नहीं कर पाते। चाहे राफेल विमानों की खरीद का सवाल हो, चाहे EVM में गड़बड़ी का मुद्दा हो, न जाने कितनी बार राहुल आरोप लगाकर उन्हें साबित नहीं कर पाए। हरदीप पुरी के केस में भी यही हुआ। राहुल ने बिना राई के पहाड़ बना दिया। एपस्टीन अमेरिका की मुसीबत है, वो संभाले। हमें उसके फटे में पैर डालने की क्या जरूरत है?
जो लोग नरेंद्र मोदी को जानते हैं वो बता सकते हैं कि डरना, झुकना, गिरना मोदी का स्वभाव नहीं है। अगर ट्रंप के आगे झुकना होता तो अमेरिका के साथ डील कई महीने पहले हो जाती। अगर मोदी ट्रंप से समझौता कर लेते तो कभी 50 प्रतिशत टैरिफ नहीं लगता। ट्रंप ने भी ये माना है कि मोदी tough negotiator हैं और ये कोई सीक्रेट नहीं है कि पिछले 10 साल में भारत ने सिर्फ अमेरिका ही नहीं, पूरी दुनिया के सामने सिर उठाकर जीना सीखा है। जो लोग अमेरिका और यूरोप में रहते हैं, वो बताते हैं कि उनका रुतबा किस कदर बढ़ा है। इसीलिए राहुल की इन बातों का कोई मतलब नहीं है कि मोदी ने भारत बेच दिया, अमेरिका ने मोदी का गला पकड़ लिया। आरोप लगाने और गाली देने में यही फर्क होता है। गालियों के लिए किसी सबूत की जरूरत नहीं होती। (रजत शर्मा)
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