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Hindi News भारत राष्ट्रीय Rajat Sharma's Blog | क्या ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस United Nations का विकल्प बनेगा?

Rajat Sharma's Blog | क्या ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस United Nations का विकल्प बनेगा?

ट्रंप की ये बात तो सही है कि संयुक्त राष्ट्र अपनी प्रासंगिकता खो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई बार ये सवाल उठाया है लेकिन इस बात की क्या गारंटी है कि बोर्ड ऑफ पीस दुनिया की उन समस्याओं को सुलझाएगा, जो संयुक्त राष्ट्र नहीं सुलझा सका?

Rajat Sharma Blog, Rajat Sharma Blog Latest, Rajat Sharma- India TV Hindi Image Source : INDIA TV इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।

दावोस से दुनिया के लिए बहुत बड़ी खबर आई। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र पुरानी बात है, बीता वक़्त, गुजरा हुआ कल है। अब दुनिया के तमाम मसले इंटरनेशनल बोर्ड ऑफ पीस सुलझाएगा। ट्रंप ने दावा किया कि दुनिया के 60 से ज्यादा मुल्कों ने उनके इंटरनेशनल बोर्ड ऑफ पीस का सदस्य बनने पर सहमति दी है। रूस के राष्ट्रपति पुतिन भी इस पीस बोर्ड में कुछ शर्तों के साथ शामिल होने के लिए राजी हैं।

ट्रंप ने इस बोर्ड में शामिल होने के लिए भारत को भी आमंत्रित किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दावोस में हो रही मीटिंग में बुलाया था लेकिन मोदी नहीं गए। आज विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत इंटरनेशनल बोर्ड ऑफ़ पीस में शामिल होने के ट्रंप के प्रस्ताव के हर पहलू पर सोच विचार करके फैसला करेगा। ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड के मुद्दे पर समझौता क़रीब क़रीब फाइनल हो चुका है। डील में क्या है, कौन सी शर्तें हैं, इसके बारे में अभी ब्यौरा नहीं दिया गया है।

अब ट्रंप का जो रुख है, जिस तरह वह विश्व व्यवस्था को बदलने की कोशिश कर रहे हैं, उसके बाद ये सवाल उठता है कि क्या अब पूरी दुनिया ट्रंप के इशारे पर चलेगी? क्या UN का अस्तित्व वाकई खत्म हो जाएगा? क्या पैसे और हथियारों के दम पर अमेरिका दुनिया के बाकी मुल्कों को डराएगा? इन सबका भारत पर क्या असर होगा? भारत की रणनीति क्या होगी, यह विचारणीय है।

ट्रंप ने दावोस इंटरनेशनल बोर्ड ऑफ पीस लॉन्च किया, इसके चार्टर पर दस्तखत किए और खुद इसके आजीवन अध्यक्ष बन गए। हालांकि पहले जब ट्रंप ने ग़ज़ा में शांति समझौते के तहत इस बोर्ड के गठन की घोषणा की थी, तब इसे सिर्फ़ ग़ज़ा और मिडिल ईस्ट की ज़िम्मेदारी देने की बात कही गई थी लेकिन आज ट्रंप ने कहा कि उनका ये बोर्ड ऑफ़ पीस दुनिया के किसी भी मसले को सुलझाने के लिए, उसमें दख़ल देने के लिए आजाद होगा। ट्रंप ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र एक अच्छी संस्था थी, वह बहुत अच्छे तरीके से काम कर सकती थी लेकिन अब UN का कोई मतलब नहीं रह गया क्योंकि जब दुनिया में ख़ून-ख़राबा हो रहा था, तो संयुक्त राष्ट्र हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा,  इसीलिए बोर्ड ऑफ पीस बनाने की ज़रूरत पड़ी।

इस बोर्ड में शामिल होने के लिए अब तक करीब 60 देशों ने हामी भर दी है। इंटरनेशनल बोर्ड ऑफ़ पीस के अध्यक्ष के तौर पर सबसे पहले ट्रंप ने चार्टर पर दस्तखत किये। इसके बाद हंगेरी, बेलारूस, इंडोनेशिया, मिस्र, अज़रबैजान, बहरीन, मोरक्को, कज़ाख़िस्तान, वियतनाम, पाकिस्तान, अर्जेंटीना और आर्मेनिया के नेताओं ने भी चार्टर पर दस्तखत किए। इसके अलावा जॉर्डन, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात  जैसे इस्लामिक देशों ने भी ट्रंप के बोर्ड ऑफ़ पीस में शामिल होने का फैसला किया।

दुनिया में सवाल उठ रहे हैं कि क्या ट्रंप का ये बोर्ड ऑफ पीस संयुक्त राष्ट्र के समानान्तर काम करेगा या उसकी जगह लेगा। अभी बहुत ज्यादा स्पष्टता नहीं है, किसी को नहीं पता कि ट्रंप का प्लान क्या है, वह क्या चाहते हैं। इसीलिए अब तक भारत, फ्रांस, जर्मनी, चीन और ब्रिटेन ने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के आमंत्रण पर कोई फैसला नहीं किया है। तमाम देशों को दुविधा इसलिए है क्योंकि पहले इसे ग़ज़ा के पुनर्निर्माण के लिए लॉन्च किया था लेकिन इसके चार्टर में बोर्ड को एक अन्तरराष्ट्रीय संगठन  बताया गया है, जो पूरी दुनिया में शांति और स्थिरता को आगे बढ़ाने के लिए काम करेगा।

इस बोर्ड की कार्यकारी समिति में ज्यादातर ट्रंप के करीबी लोग हैं। ट्रंप खुद इस बोर्ड के आजीवन अध्यक्ष हैं, उनके दोस्त स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेयर्ड कुशनर भी बोर्ड के स्थायी सदस्य हैं, अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गैब्रिएल, विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, वर्ल्ड बैंक के चेयरमैन अजय बंगा और अमेरिकी कारोबारी मार्क रोवन को भी इसमें शामिल किया गया है।

वैसे तो ट्रंप ने कहा है कि ये बोर्ड संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर काम करेगा लेकिन ट्रंप ने बार-बार संयुक्त राष्ट्र को एक नाकारा संस्था बताया और कहा कि उन्होंने खुद दुनिया में 8 युद्ध रुकवाए और कभी भी इसके बारे में संयुक्त राष्ट्र से बात नहीं की, इसीलिए अब वो बोर्ड ऑफ़ पीस बना रहे हैं, जो दुनिया को खून-खराबे और नफरत भरी जंगों से निजात दिलाएगा।

बोर्ड ऑफ पीस में पुतिन को आमंत्रित करने को लेकर ट्रंप से सवाल पूछे गए क्योंकि ट्रंप पहले कह रहे थे कि पुतिन ग्रीनलैंड पर कब्जा करना चाहते हैं। इस पर ट्रंप ने perfect dealmaker वाला जवाब दिया। ट्रंप ने कहा कि उनको पुतिन से शिकायतें तो हैं लेकिन, वो नहीं चाहते कि बोर्ड में सिर्फ अच्छे लोग रहें, वो दुनिया के उन तमाम शैतान बच्चों को अपने बोर्ड में शामिल कर रहे हैं, जो बदमाशी करते हैं। बोर्ड में शामिल होने के बाद उनकी शैतानियां बंद हो जाएंगी।

ट्रंप की ये बात तो सही है कि संयुक्त राष्ट्र अपनी प्रासंगिकता खो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कई बार ये सवाल उठाया है लेकिन इस बात की क्या गारंटी है कि बोर्ड ऑफ पीस दुनिया की उन समस्याओं को सुलझाएगा, जो संयुक्त राष्ट्र नहीं सुलझा सका? इस बात पर कैसे यकीन किया जाए कि ट्रंप का बोर्ड संयुक्त राष्ट्र का स्थान ले  सकता है?

ये कौन सुनिश्चित  करेगा कि बोर्ड ऑफ पीस पर सिर्फ ट्रंप का वर्चस्व नहीं रहेगा, क्योंकि ये बोर्ड बनाने से पहले दूसरे मुल्कों से चर्चा नहीं की गई। ये सिर्फ राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश से बना। किसी भी अंतरराष्ट्रीय संगठन की विश्वसनीयता तब बनती है जब बाकी देश उस पर भरोसा करते हैं। बोर्ड ऑफ पीस अभी वो भरोसा नहीं जीत पाया है। (रजत शर्मा)

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 22 जनवरी, 2026 का पूरा एपिसोड

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