Rajat Sharma's Blog | ED के छापों में दखलंदाज़ी: क्या इससे ममता को फायदा पहुंचेगा?
हाई-वोल्टेज सियासी ड्रामा गुरुवार को तब हुआ जब बंगाल के कोयला घोटाले और हवाला लेनदेन मामलों में ED ने दिल्ली और पश्चिम बंगाल में एक साथ 10 जगहों पर छापे मारे। ED की एक टीम कोलकाता में प्रतीक जैन के घर पर पहुंच गई। वह तृणमूल कांग्रेस की IT सेल का भी काम-काज देखते हैं।

बंगाल में वो हुआ जो देश के इतिहास में कभी, कहीं नहीं हुआ। एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट के छापे को रोकने लिए खुद मुख्यमंत्री पहुंच गई। ममता बनर्जी ED की टीम से जब्त किए गए कागजात, फोन और हार्ड डिस्क छीन कर अपने साथ ले गईं।
ED ने गुरुवार को कोयला घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला के केस में I-PAC के दफ्तर और I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर छापे मारे। लेकिन जैसे ही ये खबर फैली तो ममता बनर्जी पहले प्रतीक जैन के घर पहुंची। फिर पुलिस कमिश्नर, डिप्टी पुलिस कमिश्नर और दूसरे पुलिस अफसरों की भारी फौज के साथ मुख्यमंत्री I-PAC के दफ्तर में घुसीं, वहां से फाइलें बाहर भेजीं और खुद ममता चार घंटे तक वहां बैठी रहीं। ममता ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस की चुनावी रणनीति को चुराने के लिए बीजेपी ने ED को I-PAC के दफ्तर में भेजा, बंगाल में बीजेपी ने एजेंसीज के इस्तेमाल की शुरूआत की है लेकिन अब बीजेपी को भी इसका अंजाम भुगतना होगा।
कुछ देर बाद कोलकाता पुलिस ने ED अफसरों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली। वहीं तृणमूल कांग्रेस ने हाईकोर्ट में ED के ख़िलाफ़ अर्जी दायर कर दी। ED ने भी हाईकोर्ट में अर्जी दायर की। सवाल ये है कि क्या किसी मुख्यमंत्री का जांच एजेंसी के काम में रुकावट डालना ठीक है? क्या ममता बनर्जी ने कानून तोड़ा? क्या अब ED ममता को गिरफ्तार कर सकती है? इस घटना का बंगाल की चुनावी राजनीति पर क्या असर होगा?
हाई-वोल्टेज सियासी ड्रामा गुरुवार को तब हुआ जब बंगाल के कोयला घोटाले और हवाला लेनदेन मामलों में ED ने दिल्ली और पश्चिम बंगाल में एक साथ 10 जगहों पर छापे मारे। ED की एक टीम कोलकाता में प्रतीक जैन के घर पर पहुंच गई। प्रतीक जैन पॉलिटिकल कंसलटेंसी कंपनी I-PAC के को-फाउंडर हैं। वो तृणमूल कांग्रेस की IT सेल का भी काम-काज देखते हैं। ED का दावा है कि कोयला घोटाले की जांच के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला लेनदेन के तार I-PAC से जुड़े होने के सबूत मिले थे। कोलकाता के साल्ट लेक इलाके में I-PAC के दफ्तर पर भी छापा मारा।
सबसे पहले दक्षिण कोलकाता के डिप्टी पुलिस कमिश्नर SHO और कई पुलिस वालों के साथ प्रतीक जैन के घर पहुंच गए। उन्होंने ED अफसरों के ID कार्ड चेक किए। ED टीम ने पुलिस को छापे की वजह बताई। इसके बाद कोलकाता के पुलिस कमिश्नर, बिधाननगर के पुलिस कमिश्नर पुलिस की भारी लश्कर लेकर पहुंच गए। फिर बंगाल के DGP राजीव कुमार भी आ गए। जब पुलिस और ED के अफसरों के बीच बात हो रही थी, उसी वक्त मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का काफिला प्रतीक जैन के घर पर पहुंच गया। ममता सीधे प्रतीक जैन के घर में घुसीं और पुलिस अफसरों से वो सारी फाइलें कब्जे में लेने को कहा जो ED ने प्रतीक जैन के घर से जब्त की थी।
ममता बनर्जी के हुक्म पर पुलिस की टीम ने प्रतीक जैन का एक iPhone और एक हार्ड डिस्क समेत कई कागजात ED के अधिकारियों से ले लिए और सारे दस्तावेज बाहर खड़ी एक पुलिस की गाड़ी में रख दिए। ममता बनर्जी खुद ED से छीना गया iPhone, एक हार्ड डिस्क और एक हरे रंग की फाइल लेकर प्रतीक जैन के घर से बाहर निकलीं। ममता ने मीडिया के सामने आरोप लगाया कि बीजेपी ने चुनावी रणनीति से जुड़े उनकी पार्टी के गोपनीय दस्तावेज और डेटा ED के जरिए चुराने की कोशिश की है। कुछ कागजात तो उन्होंने वापस ले लिए हैं लेकिन बहुत सा डेटा ED ने ट्रांसफर कर लिया है।
ममता ने गृह मंत्री अमित शाह के लिए शैतान, बदमाश जैसे शब्दों का प्रयोग किया। कहा, शैतान गृह मंत्री, बदमाश गृह मंत्री, जो देश की हिफाज़त नहीं कर सकते, वो मेरी पार्टी के सारे दस्तावेज़ छीनकर ले जा रहे हैं। इसी तरह अगर मैं बीजेपी के पार्टी ऑफिस पर छापे मारूं, तो क्या होगा? फिर इसका क्या नतीजा होगा?
बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा, ममता बनर्जी ड्रामा करती है, अपने भ्रष्ट नेताओं और चहेते पुलिस अफसरों को बचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग पहले भी कर चुकी हैं। शुभेंदु ने कहा कि ममता ने ED के काम में दखल देकर संवैधानिक पद की मर्यादा को तोड़ा है। इसलिए अब ED को ममता के खिलाफ लीगल एक्शन लेना चाहिए। ED ने एक बयान में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पुलिस अफसरों के साथ IPAC के दफ्तर में पहुंचीं और जब्त किया गया एक फोन, एक हार्ड डिस्क और कुछ फाइलें ED की टीम से छीन लीं। ED ने साफ किया कि आज की raids का राजनीति से कोई लेना देना नहीं है।
ममता बनर्जी को लगता है कि ED की टीम I-PAC के दफ्तर में TMC की फाइलें उठाने आईं थी। बीजेपी का आरोप है कि ममता अपनी पुलिस लेकर I-PAC को मनी लॉन्ड्रिंग से बचाने आई थी। ममता का कहना है कि ये वो फाइलें हैं, हार्ड डिस्क, लैपटॉप हैं, जिनका इस्तेमाल चुनाव रणनीति बनाने के लिए किया जा रहा था।
अब सवाल ये है कि तृणमूल कांग्रेस की रणनीति की फाइल और हार्ड डिस्क I-PAC के ऑफिस में क्यों रखे गए? I-PAC का ऑफिस किसी राजनीतिक पार्टी का ऑफिस नहीं है। क्या ED को इस पर छापा मारने से रोकना कानून का उल्लंघन नहीं है? अगर एक मिनट के लिए ये मान भी लिया जाए कि बीजेपी की सरकार ने ED का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया तो क्या ममता ने बंगाल पुलिस का इस्तेमाल तृणमूल कांग्रेस के काम के लिए नहीं किया?
अगर ममता इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाएंगी तो सिर्फ बीजेपी नहीं, कांग्रेस और CPM भी उन पर I-PAC के जरिए काला धन के इस्तेमाल का आरोप लगाएंगी अब ममता के लिए एक तरफ कुआं है, दूसरी तरफ खाई। (रजत शर्मा)
देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 08 जनवरी, 2026 का पूरा एपिसोड