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सोनिया बोलीं- हाथरस की निर्भया की मृत्यु नहीं हुई उसे मारा गया, पुलिस के ज़ोर से जला दिया गया

सोनिया गांधी ने कहा कि हाथरस की निर्भया की मृत्यु नहीं हुई है उसे मारा गया है-एक निष्ठुर सरकार, उसके प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार की उपेक्षा द्वारा।

hathras gangrape case sonia gandhi reaction । सोनिया बोलीं- हाथरस की निर्भया की मृत्यु नहीं हुई उसे - India TV Hindi Image Source : PTI सोनिया बोलीं- हाथरस की निर्भया की मृत्यु नहीं हुई उसे मारा गया, पुलिस के ज़ोर से जला दिया गया

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में हुई घिनौनी घटना पर कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी की तरफ से प्रतिक्रिया दी गई है। सोनिया गांधी ने कहा, "हाथरस की निर्भया की मृत्यु नहीं हुई है उसे मारा गया है-एक निष्ठुर सरकार, उसके प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार की उपेक्षा द्वारा। जब ज़िंदा थी तो उसकी सुनवाई नहीं हुई उसकी रक्षा नहीं हुई। उसकी मृत्यु के बाद उसे अपने घर की मिट्टी और हल्दी भी नसीब नहीं होने दी।"

उन्होंने आगे कहा कि उस बच्ची को अनाथों की तरह पुलिस के ज़ोर से जला दिया गया। ये कैसा न्याय है? ये कैसी सरकार है? आपको लगता है कि आप कुछ भी कर लेंगे और देश देखता रहेगा? बिलकुल नहीं! देश बोलेगा अन्याय के खिलाफ। मैं कांग्रेस की तरफ से हाथरस पीड़ित परिवार के न्याय की मांग के साथ खड़ी हूं।

प्रियंका ने मांगा सीएम योगी का इस्तीफा
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में सामूहिक दुष्कर्म का शिकार हुई पीड़िता का पुलिस द्वारा कथित तौर पर अंतिम संस्कार किए जाने को लेकर बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इस्तीफा मांगा और आरोप लगाया कि राज्य की भाजपा सरकार में सिर्फ अन्याय का बोलबाला है।

प्रियंका ने एक वीडियो जारी कर कहा, ‘‘ये हादसा 14 तारीख को हुआ। आज 30 तारीख है और आज पहली बार मुख्यमंत्री जी ने इस हादसे पर बयान दिया है। इतनी हैवानियत हुई इस लड़की के साथ, इतना बड़ा हादसा हुआ और 15 दिन बाद इनका बयान आया है और बयान में क्या कहते हैं कि प्रधानमंत्री जी का फोन आया और मैंने एसआईटी बनाया है।’’

उन्होंने सवाल किया, ‘‘क्या आपको (योगी) प्रधानमंत्री जी के फोन का इंतजार था? क्या 15 दिनों में आप कुछ नहीं कर पाए?’’ कांग्रेस की उत्तर प्रदेश प्रभारी ने दावा किया, ‘‘उसके परिवार के साथ कैसा व्यवहार किया कि वे अपनी बेटी का शव आखिरी बार अपने घर नहीं ले जा पाए, उसकी चिता को उसके पिता आग नहीं दे पाए। उनको एक कमरे में बंद किया गया। इस तरह का व्यवहार अमानवीयता का सबसे बड़ा उदाहरण है।’’

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