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भारत के इस राज्य में मिला दूसरे विश्व युद्ध के समय का बम, 227 किलोग्राम था वजन, डिफ्यूज किया गया

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में बुधवार को सेना के जवानों और पुलिसकर्मियों ने द्वितीय विश्व युद्ध के समय के एक बम को डिफ्यूज किया है। इससे पहले भी 25 मार्च को जिले में दो बमों को निष्क्रिय किया गया था।

Jharkhand East Singhbhum World War II-era bomb- India TV Hindi
Image Source : X (@SETHSANJAYMP) दूसरे विश्व युद्ध के समय के बम को निष्क्रिय किया गया।

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में कथित तौर पर द्वितीय विश्व युद्ध के समय के एक बम को बरामद किया गया है जिसके बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। इस बम का वजन 227 किलोग्राम बताया जा रहा है। अधिकारियों की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, इस बम को बीते 15 अप्रैल को  बहरागोरा इलाके में स्वर्णरेखा नदी के तल पर ग्रामीणों बरामद किया गया था। इसके बाद आज बुधवार को इस द्वितीय विश्व युद्ध के समय के बम को भारतीय सेना के जवानों और पुलिस कर्मियों ने मिलकर डिफ्यूज कर दिया है।

कैसे डिफ्यूज किया गया बम?

जानकारी के मुताबिक, द्वितीय विश्व युद्ध के समय का बरामद होने के बाद जिला पुलिस ने इसे निष्क्रिय करने के लिए सेना से मदद मांगी थी। पुलिस ने बताया- सेना और पुलिस के बम निरोधक दस्ते ने आज सुबह बम को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया। पूरी कार्रवाई के दौरान किसी को कोई चोट नहीं आई।" सेना के जवानों और बम निरोधक दस्ते ने पहले घटनास्थल का मुआयना किया। फिर नदी के तट पर एक बड़ा गड्ढा बनाया, इसके बाद उस गड्ढे में विस्फोटक भरा गया। फिर गड्ढे को रेत की बोरियों से ढक दिया गया और इसमें विस्फोट कराया गया।

रक्षा राज्य मंत्री ने दी जानकारी

इस मामले को लेकर भारत के रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने बताया- "बहरागोड़ा (जमशेदपुर) में स्वर्णरेखा नदी में मिले अज्ञात शक्तिशाली बम को आज सेना के विशेषज्ञों ने पूरी तरह निष्क्रिय (Unexploded) कर सुरक्षित रूप से नष्ट कर दिया गया। यह एक जोखिम भरा काम था, जिसे हमारे सैन्य विशेषज्ञों ने सफलता पूर्वक अंजाम दिया। पूरी प्रक्रिया में स्थानीय प्रशासन का सराहनीय सहयोग रहा। इस क्षेत्र में द्वितीय विश्व युद्ध काल के बमों को निष्क्रिय करने की यह दूसरी घटना है। यह बम इतना शक्तिशाली था कि इसके विस्फोट से जान-माल की भारी क्षति हो सकती थी। भारतीय सेना के विशेषज्ञों ने कुशल रणनीति और सटीक क्रियान्वयन के साथ इस चुनौतीपूर्ण कार्य में सफलता प्राप्त की। इस कार्य के लिए भारतीय सेना के विशेषज्ञों के साहस और कर्तव्यनिष्ठता को सलाम! स्थानीय प्रशासन को साधुवाद।" (भाषा के इनपुट के साथ)

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