झारखंड के हजारीबाग जिले में सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक दर्ज की है। सामने आई जानकारी के अनुसार, झारखंड के चतरा और हजारीबाग के सीमावर्ती जंगलों में हुई एक भीषण मुठभेड़ में पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने चार कुख्यात नक्सलियों को मार गिराया है। मारे गए नक्सलियों में संगठन के शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा रहा सहदेव महतो भी शामिल है। ये कार्रवाई हजारीबाग जिले के खपिया जंगल क्षेत्र में सीआरपीएफ (CRPF) की 209 कोबरा CoBRA बटालियन टीम ने की है। आइए जानते हैं कि अब तक इस मुठभेड़ को लेकर अब तक क्या जानकारी सामने आई है।
मारे गए नक्सलियों में बड़े नाम शामिल
झारखंड के हजारीबाग जिले में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई इस मुठभेड़ की सबसे बड़ी खबर 15 लाख रुपये के इनामी उग्रवादी सहदेव महतो का मारा जाना है। इसके साथ ही सुरक्षाबलों ने महिला नक्सली नताशा को भी ढेर कर दिया है। मुठभेड़ के बाद जब इलाके की तलाशी ली गई, तो चार नक्सलियों के शव बरामद हुए। इनकी पहचान संगठन के भारी-भरकम कैडर के रूप में हुई है।
1. सहदेव महतो उर्फ अनुज: रीजनल कमेटी मेंबर (RCM) और दस्ते का सरगना।
2. नताशा: स्पेशल ज़ोनल कमेटी मेंबर (SZCM)।
3. बुधन कर्माली: एरिया कमांडर।
4. रंजीत गंझू: एरिया कमांडर।
खुफिया इनपुट पर हुई घेराबंदी
सामने आई जानकारी के अनुसार, पुलिस प्रशासन को गुप्त सूचना मिली थी कि चतरा-हजारीबाग सीमा पर नक्सलियों का एक बड़ा दस्ता किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए जमा हुआ है। इस सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने संयुक्त ऑपरेशन शुरू किया। खुद को घिरा देख नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में जवानों ने मोर्चा संभाला। काफी देर तक चली इस मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने साहस का परिचय देते हुए चार नक्सलियों को ढेर कर दिया।
अत्याधुनिक हथियारों का जखीरा बरामद
घटनास्थल से सुरक्षा बलों ने भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया है। बरामद हथियारों में शामिल हैं:
- 02 AK सीरीज राइफल
- 01 कोल्ट AR-15 राइफल (अत्याधुनिक अमेरिकी तकनीक वाली राइफल)
- 01 इंसास (INSAS) राइफल
इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी
हजारीबाग में मिली इस बड़ी कामयाबी के बाद भी सुरक्षाबल ढील देने के मूड में नहीं हैं। पूरे वन क्षेत्र में अतिरिक्त सहायता भेज दी गई है और सर्च ऑपरेशन को तेज कर दिया गया है। पुलिस को अंदेशा है कि कुछ और नक्सली घायल अवस्था में घने जंगलों का फायदा उठाकर छिपे हो सकते हैं। (रिपोर्ट: मुकेश सिन्हा)