A
Hindi News लाइफस्टाइल फैशन और सौंदर्य हेल्दी हेयर और जवां स्किन के लिए लोग करा रहे हैं Exosome Therapy? एक्सपर्ट से जानें इसकी खूबियां और साइड इफेक्ट्स

हेल्दी हेयर और जवां स्किन के लिए लोग करा रहे हैं Exosome Therapy? एक्सपर्ट से जानें इसकी खूबियां और साइड इफेक्ट्स

अपने आप को यंग और खूबसूरत दिखाने के लिए लोग कई तरह के मंहगे महंगे ट्रीटमेंट कराते हैं। इन दिनों एक्सोसोम थेरेपी भी लोग खूब करा रहे हैं। चलिए एक्सपर्ट से जानते हैं इसके फायदे और नुकसान?

एक्सोसोम थेरेपी- India TV Hindi Image Source : FREEPIK एक्सोसोम थेरेपी

आजकल लोग खूबसूरत और जवां बने रहने के लिए तरह-तरह के स्किन से लेकर हेयर ट्रीटमेंट कराते हैं। इन दिनों युवाओं में एक्सोसोम थेरेपी (Exosome Therapy) को लेकर खूब क्रेज़ देखने को मिल रहा है। यह थेरेपी बालों और स्किन के लिए फायदेमंद मानी जाती है। एक्सपर्ट के अनुसार, यह थेरेपी सूजन कम करती है और कोलेजन प्रोडक्शन को बढ़ाती है जिससे हेयर थिनिंग, हेयर फॉल और त्वचा की समस्याओं का इलाज होता है। लेकिन यह कितनी कारगर है? इसकी खूबियां क्या है और इसे कराने के बाद साइड इफेक्ट्स क्या हो सकते हैं। चलिए, क्रायोविवा लाइफ साइंसेज की मेडिकल डॉयरेक्टर, डॉ। अदिति कुंडू से जानते हैं?

एक्सोसोम थेरेपी क्या है?

एक्सोसोम थेरेपी शरीर की सेल-टू-सेल कम्युनिकेशन सिस्टम को एक्टिव करने का काम करती है। एक्सोसोम छोटे वेसीकल्स होते हैं, जो स्टेम सेल्स से निकलते हैं और इनमें प्रोटीन, ग्रोथ फैक्टर, और अन्य बायोएक्टिव तत्व मौजूद रहते हैं। जब इन्हें सही तरीके से स्किन या स्कैल्प में दिया जाता है, तो ये सोई हुई और कमजोर हो चुकी कोशिकाओं को रिपेयर करते हैं। जिससे नई कोशिकाओं का निर्माण तेज होता है। यही वजह है कि इसे बायोलॉजिकल रीजुवेनेशन माना जाता है।

क्या है इसके फायदे??

यह थेरेपी बालों में प्राकृतिक तरीके से काम करती है और धीरे धीरे इसके अच्छे रिजल्ट आते हैं। इसके आलावा यह ट्रीटमेंट चेहरे की झुर्रियां, पिग्मेंटेशन, ओपन पोर्स और स्किन टेक्सचर को सुधारने में मदद करता है। ये उन लोगों के अधिक फायदेमंद होती है जिनमें उम्र के शुरुआती असर दिखने लगे हों, जैसे 30 से 50 साल की उम्र में स्किन का डल होना, हल्की फाइन लाइन्स आना या बालों का पतला होना

एक्सोसोम ट्रीटमेंट के साइड इफेक्ट?

एक्सोसोम थेरेपी के कुछ साइड इफेक्ट हो सकते हैं। इंजेक्शन या माइक्रोनीडलिंग के कारण हल्की सूजन, लालिमा, जलन या चुभन कुछ घंटों से लेकर एक-दो दिन तक रह सकती है। कुछ मामलों में एलर्जिक रिएक्शन या इंफेक्शन का खतरा हो सकता है, खासकर तब जब थेरेपी स्टैंडर्ड मेडिकल प्रोटोकॉल के बिना की जाए। इसलिए इसको कराने से पहले पूरी मेडिकल काउंसलिंग बेहद जरूरी है। गर्भवती महिलाएं, ऑटोइम्यून बीमारी से पीड़ित मरीज या जिन्हें गंभीर एलर्जी की समस्या है, उन्हें यह थेरेपी कराने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। 

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

Latest Lifestyle News