भारतीय घरों में घी सिर्फ एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि शुद्धता और सेहत का प्रतीक भी माना जाता है। बाजार में मिलने वाले घी में मिलावट होती है, ऐसे में आज भी लोग घरों में देसी पारंपरिक तरीके से घी निकालना पसंद करते हैं। इन्हीं तरीकों में से एक घी बनाते समय पान के पत्ते का इस्तेमाल। अक्सर हमारी दादी-नानी घी बनाते समय उसमें पान का पत्ता डाल दिया करती थीं। लेकिन क्या आपको मालूम है कि घी बनाते समय पान के पत्ते का इस्तेमाल करने से क्या होता है। आइए जानते हैं।
1. नेचुरल प्रिजर्वेटिव
पान के पत्तों में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-माइक्रोबियल गुण होते हैं। जब मक्खन को पिघलाकर घी बनाया जाता है, तो पान का पत्ता उसमें मौजूद नमी और अशुद्धियों को सोख लेता है। यह घी के ऑक्सीकी प्रक्रिया को धीमा कर देता है, जिससे घी लंबे समय तक खराब नहीं होता और उसकी शेल्फ-लाइफ काफी बढ़ जाती है।
2. सोंधी महक और स्वाद
कई बार मलाई या मक्खन को कुछ दिनों तक इकट्ठा करने के कारण उसमें एक अजीब सी महक या खट्टापन आ जाता है। घी उबलते समय जब इसमें पान का पत्ता डाला जाता है, तो यह उस गंध को पूरी तरह खत्म कर देता है। पान के पत्ते का अर्क घी में मिलकर उसे एक बेहतरीन, सोंधी और ताजी खुशबू देता है। इससे घी का स्वाद भी दोगुना बढ़ जाता है।
3. पाचन क्रिया में सुधार
आयुर्वेद में पान के पत्ते को पाचन के लिए वरदान माना गया है। जब घी को पान के पत्ते के साथ पकाया जाता है, तो पत्ते के पाचक गुण घी में समाहित हो जाते हैं। ऐसा घी भारी होने के बावजूद आसानी से पच जाता है, पेट में गैस या भारीपन नहीं करता और भूख को बढ़ाने में मदद करता है।
4. घी को मिलता है दानेदार टेक्सचर
एक अच्छे घी की पहचान उसका दानेदार होना है। पान का पत्ता घी के तापमान को एक समान बनाए रखने में मदद करता है, जिससे घी के कण अच्छी तरह से टूटते हैं और घी एकदम दानेदार बनता है।
इस्तेमाल करने का सही तरीका
जब आप मलाई या मक्खन को कड़ाही में पिघला रहे हों और घी लगभग बनकर तैयार होने वाला हो, तब उसमें एक अच्छी तरह धुला और सुखाया हुआ साबुत पान का पत्ता डाल दें। इसे 2 से 3 मिनट तक घी के साथ पकने दें और फिर गैस बंद कर दें। घी ठंडा होने के बाद पत्ते को बाहर निकाल लें और घी को छानकर कांच के जार में भर लें।
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