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Hindi News लाइफस्टाइल जीवन मंत्र ...तो इस कारण मां भगवती ने किया था महिषासुर का वध

...तो इस कारण मां भगवती ने किया था महिषासुर का वध

स्त्रों में कहा गया है कि जो भी मां भगवती का अपमान करता है। उसे वह किसी न किसी तरह सजा जरुर देती है। चाहे वो प्रत्यक्ष रुप में हो या फिर अप्रत्यक्ष रुप में हो। इन्हीं में से एक है महिषासुर राक्षस। जिसका वध स्वंय मां दुर्गा ने किया। जानिए वध का कारण..

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अंहकार के कारण गया गलत रास्ते में
ब्रह्मा जी से यह वरदान प्राप्त करते ही महिषासुर का अहंकार और ज्यादा बढ़ गया। अपनी सेना के साथ उसने धरती पर आक्रमण कर दिया। चारों तरफ त्राहिमाम-त्राहिमाम होने लगा।

समस्त जीवों और प्राणियों को उसके सामने नतमस्तक होना ही पड़ा। भूलोक और पाताल को अपने अधीन करने के बाद महिषासुर ने इन्द्रलोक पर भी आक्रमण कर दिया और इन्द्र देव को पराजित कर स्वर्ग को अपने अधीन कर लिया।

महादेव और ब्रह्मा जी के साथ सभी देवतागण विष्णु जी के पास सहायता मांगने के लिए पहुंचे। लेकिन ब्रह्मा जी के वरदान की वजह से महिषासुर अत्यंत शक्तिशाली हो चुका था इसलिए विष्णु जी ने कहा “हम सभी को मिलकर देवी शक्ति के पास मदद की गुहार लगानी चाहिए”।

ऐसे प्रकट हुए भगवती
जब सभी देवताओं ने मिलकर देवी शक्ति को सहायता के लिए पुकारा और इतने में ही सभी देवताओं के शरीर में से निकले तेज ने एक अत्यंत खूबसूरत सुंदरी का रूप ले लिया। भगवती के रूप और तेज से सभी देवता आश्चर्यचकित हो गए।

मां को ऐसे मिले अस्त्र-शस्त्र
हिमवान ने देवी भगवती को सवारी के लिए सिंह दिया और सभी देवताओं ने उन्हें अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र सौंपे।

मां के प्रति आकर्षित होना बना मृत्यु का दूसरा कारण
देवी का रूप देखकर महिषासुर उनके प्रति बहुत आकर्षित होने लगा और अपने दूत के जरिए विवाह का प्रस्ताव देवी तक पहुंचाया। महिषासुर की इस हरकत ने देवी भगवती को अत्याधिक आक्रोशित कर दिया, उन्होंने महिषासुर को युद्ध के लिए ललकारा।

भगवती देवी ने दूत से कहा कि जाकर महिषासुर को यह संदेश पहुंचा दे कि या तो स्वयं पाताल लोक चला जाए या फिर अपनी मृत्यु के लिए तैयार रहे। दूत ने अपने सम्राट को देवी का यह संदेश पहुंचा दिया।

युद्ध की ललकार सुनकर महिषासुर भगवती से युद्ध करने आ पहुंचा। एक-एक करके महिषासुर की संपूर्ण सेना का सर्वनाश हो गया। असुर सम्राट ने विभिन्न रूप धरकर भगवती देवी को छलने की कोशिश की। लेकिन उसकी सभी कोशिश नाकाम रही, देवी भगवती ने अपने चक्र से महिषासुर की सिर काट डाला। इस तरह अंत: देवी भगवती के हाथों आखिरकार उसकी मृत्यु संभव हुई।

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