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MP: सगे भाइयों के हत्यारे पिता-पुत्र को होगी 'फांसी', बर्थडे पार्टी में न बुलाने पर हुआ था विवाद

देवेंद्रनगर डबल मर्डर केस में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। दो सगे भाइयों की हत्या और उनकी मां पर जानलेवा हमले के मामले में पिता-पुत्र को फांसी की सजा सुनाई गई है। यहां आरोपियों के अपने रिश्तेदारों ने ही कोर्ट में उनके खिलाफ गवाही दी थी।

panna court- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT पन्ना कोर्ट

खून के रिश्तों को शर्मसार करने वाले पन्ना जिले के देवेंद्रनगर के गोल्डी मुड़िया गांव के दोहरे हत्याकांड में कानून ने एक ऐतिहासिक मिसाल पेश की है। अदालत ने अपने ही दो सगे भाइयों की हत्या और मां को लहूलुहान करने वाले आरोपी पिता चरन सिंह राजपूत व उसके बेटे शुभम सिंह को फांसी (मृत्युदंड) की सजा सुनाई है। जमीनी विवाद और जन्मदिन में न बुलाने की रंजिश इस हत्याकांड की वजह बनी थी।

मातम में बदलीं जन्मदिन की खुशियां

घटना ​27 मई 2023 की है जब एक मासूम के जन्मदिन की खुशियां गोलियों की तड़तड़ाहट से मातम में बदल गई थीं। जमीनी विवाद की रंजिश में अंधे होकर पिता-पुत्र ने दो भाइयों नरेंद्र और महेंद्र सिंह की निर्मम हत्या कर दी थी। जबकि इस जानलेवा हमले में उनकी मां गंभीर रूप से घायल हो गई। 

जमीन विवाद के चलते बर्थडे पार्टी में नहीं किया था इनवाइट

ग्राम गोल्डी मुड़िया में नरेन्द्र सिंह के पुत्र का जन्मदिन था। जमीन विवाद के चलते चरन सिंह और उसके परिवार को इस कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया था। इसी बात से आक्रोशित होकर चरन सिंह अपने पुत्र शुभम के साथ वहां पहुंचा। जब घर के बाहर नरेन्द्र सिंह, उनका भाई महेन्द्र सिंह और उनके माता-पिता बैठे थे तभी पिता-पुत्र ने पिस्टल से ताबड़तोड़ गोलियां चला दी। फायरिंग में नरेन्द्र सिंह और महेन्द्र सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी मां फूलाबाई बीच-बचाव के दौरान हाथ में गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गईं।

रिश्तेदारों की गवाही ने फांसी के फंदे तक पहुंचाया

न्यायाधीश सुरेंद्र मेश्राम की अदालत ने इस कृत्य को 'जघन्यतम' श्रेणी का मानते हुए स्पष्ट किया कि रिश्तों का कत्ल करने वालों के लिए समाज में कोई जगह नहीं है। इस मामले में सबसे बड़ी जीत 'सत्य' की हुई, जहां आरोपियों के अपने रिश्तेदारों ने ही कोर्ट में उनके खिलाफ गवाही दी। पुलिस की सटीक विवेचना और अभियोजन के मजबूत तर्कों ने अंततः कातिलों को फांसी के फंदे तक पहुंचा दिया। यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए मरहम है, बल्कि अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश भी है।

(रिपोर्ट- अमित सिंह)

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