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Hindi News महाराष्ट्र महाराष्ट्र में दो साल में 1.17 लाख महिलाएं-नाबालिग लड़कियां लापता 86 हजार मिलीं, CM फडणवीस ने दी जानकारी

महाराष्ट्र में दो साल में 1.17 लाख महिलाएं-नाबालिग लड़कियां लापता 86 हजार मिलीं, CM फडणवीस ने दी जानकारी

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में लिखित जवाब में दी है कि राज्य में दो साल में 1.17 लाख महिलाएं-नाबालिग लड़कियां लापता हुई हैं। इनमें से 86 हजार मिल गई हैं और 31 हजार से ज्यादा अब भी गायब हैं।

cm devendra fadnavis- India TV Hindi Image Source : PTI सीएम देवेंद्र फडणवीस ने जारी किया चौंकाने वाला आंकड़ा। (फाइल फोटो)

महाराष्ट्र सरकार ने महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के लापता होने के मामले में बड़ा अहम आंकड़ा जारी किया है। जानकारी के मुताबिक, राज्य में में साल 2024 और 2025 के दौरान 1 लाख 17 हजार 369 महिलाएं और नाबालिग लड़कियां लापता हुईं। इनमें से 86 हजार 228 को पुलिस ने खोज निकाला है, जबकि 31 हजार 141 से अधिक महिलाएं और लड़कियां अब भी लापता हैं। यह जानकारी राज्य के मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को विधानसभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में दी।

महिलाओं और नाबालिगों का अलग-अलग आंकड़ा

सरकार की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, साल 2024–25 के दौरान 93,940 महिलाओं के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुई, जिनमें से 67,458 को ढूंढ लिया गया। वहीं 23,429 नाबालिग लड़कियों के गुमशुदा मामलों में 18,770 को उनके परिवारों से मिलाया गया।

मुंबई में 98 फीसदी से ज्यादा नाबालिग मिली 

सामने आई जानकारी के मुताबिक, बड़े शहरों में रिकवरी रेट बेहतर रहा है। मुंबई शहर में 4,515 लापता नाबालिगों में से 4,455 को पुलिस ने तलाश कर लिया। वहीं, नवी मुंबई में दो साल में 313 लड़के और 627 लड़कियां ढूंढ ली गईं।

ऑपरेशन मुस्कान से 41 हजार बच्चों का रेस्क्यू

गृह मंत्री ने जानकारी दी है कि लापता और शोषित बच्चों की तलाश के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के तहत जुलाई 2015 से दिसंबर 2024 तक 13 चरणों में 41 हजार से अधिक बच्चों को बचाया गया। 20 जनवरी से 20 फरवरी 2026 तक अभियान का 14वां चरण जारी है, जिसमें अब तक 1,401 बच्चों को रेस्क्यू किया जा चुका है।

हर पुलिस थाने में ‘मिसिंग सेल’

फडणवीस ने बताया कि हर पुलिस थाने में महिला अधिकारियों के नेतृत्व में विशेष ‘मिसिंग सेल’ बनाए गए हैं। महिलाओं की सुरक्षा और मानव तस्करी पर नियंत्रण के लिए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) रैंक के एक आईपीएस अधिकारी को निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है, जो हर दो महीने में मामलों की समीक्षा करते हैं। सरकार का कहना है कि लापता महिलाओं और बच्चियों की तलाश सर्वोच्च प्राथमिकता है और खोज अभियान लगातार जारी रहेगा।

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