लापता बच्चों की तलाश में मुम्बई पुलिस ने एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता साबित की है। वर्ष 2025 में लापता हुए 2182 बच्चों में से 2165 (99%) को सुरक्षित घर पहुँचाने के बाद, पुलिस ने साल 2026 में भी बड़ी कामयाबी हासिल की है। जनवरी 2026 से अब तक 0-5 वर्ष की श्रेणी में लापता हुए सभी 7 मासूमों को पुलिस ने सफलतापूर्वक ढूंढ लिया है। ज्वाइंट कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) सत्यनारायण चौधरी ने बताया कि छोटे बच्चों के मामलों को 'अत्यंत उच्च प्राथमिकता' दी जाती है, यही कारण है कि इस आयु वर्ग में पुलिस का सफलता दर 100 प्रतिशत रहा है।
साल 2026 के शुरुआती महीनों में अब तक कुल 178 नाबालिगों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से 161 बच्चे मिल चुके हैं, जबकि 17 नाबालिग (8 लड़के और 9 लड़कियां) अब भी लापता हैं। ये लापता बच्चे 16 से 18 साल की उम्र के हैं। शहर भर में विशेष टीमें इन बच्चों की लोकेशन ट्रेस करने में जुटी हैं।
पुलिस की कार्यप्रणाली कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक मामले में एक ही बच्चे को 3 से 4 बार ढूंढकर वापस घर लाया गया। वह बच्चा बार-बार घर से भाग जाता था, लेकिन पुलिस ने हर बार नियम के तहत मामला दर्ज किया और उसे सुरक्षित बरामद किया। पुलिस विभाग ने लापता होने के मामलों को बेहतर तरीके से समझने के लिए उन्हें आयु के आधार पर 5 श्रेणियों में बांटा है 0-5 वर्ष, 5-10 वर्ष, 10-14 वर्ष, 14-16 वर्ष, और 16-18 वर्ष।
पिछले साल (2025) कुल 2182 गुमशुदगी के मामले सामने आए थे। इनमें से 2165 बच्चों को पुलिस ने ढूंढ लिया जिसमे म 55 प्रतिशत लड़के और 45 प्रतिशत लड़कियां शामिल थीं। वर्तमान में पुलिस की 3 से 4 टीमें देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय हैं। विभाग का लक्ष्य है कि शेष 17 नाबालिगों को भी जल्द से जल्द उनके परिवारों तक सुरक्षित पहुंचाया जाए।
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