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Hindi News महाराष्ट्र मुंबई क्राइम ब्रांच ने नशे पर किया वार, लाखों के ड्रग्स के साथ 2 गिरफ्तार

मुंबई क्राइम ब्रांच ने नशे पर किया वार, लाखों के ड्रग्स के साथ 2 गिरफ्तार

मुंबई क्राइम ब्रांच ने एक बार फिर नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने इस पूरे मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं दोनों आरोपियों को पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है।

लाखों के ड्रग्स के साथ आरोपी गिरफ्तार।- India TV Hindi Image Source : INDIA TV लाखों के ड्रग्स के साथ आरोपी गिरफ्तार।

मुंबई: नशे के खिलाफ मुंबई पुलिस द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी बीच मुंबई क्राइम ब्रांच की एंटी नारकोटिक्स सेल की वर्ली यूनिट ने आग्रीपाड़ा इलाके से दो ड्रग्स पेडलर्स को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही इन पेडलर्स के पास से 58 लाख का चरस ड्रग्स बरामद किया गया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया और उन्हें गिरफ्तार किया है। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। वहीं दोनों आरोपियों को कोर्ट ने 16 जनवरी तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया है।

16 जनवरी तक पुलिस कस्टडी

दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद मुंबई क्राइम ब्रांच ने उन्हें कोर्ट में पेश किया, जहां कोर्ट ने 16 जनवरी तक उन्हें पुलिस कस्टडी में भेजा। मामले की जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया कि पेट्रोलिंग करते समय आग्रीपाड़ा इलाके में बेबी गार्डन गेट पास दो संदिग्ध दिखाई दिए। जब पुलिस ने दोनों की तलाशी ली तो उनके पास से 1 किलो 453 ग्राम चरस ड्रग्स बरामद हुआ। इसके बाद अब पुलिस ये पता करने में जुट गई है कि आखिर ये ड्रग्स कहां से लेकर आया गया था और किसे सप्लाई किया जाने वाला था।

फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़

एक अन्य कार्रवाई में मुंबई क्राइम ब्रांच की यूनिट 10 ने अंधेरी इलाके में एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया। इस फर्जी कॉल सेंटर के माध्यम से आरोपी अमेरिकी नागरिकों को दवाओं की बिक्री के नाम पर ठगते थे। क्राइम ब्रांच के अधिकारी ने बताया कि "द समिट बिजनेस बे"(ओमकार) नाम की कंपनी के परिसर में छापेमारी कर,10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। क्राइम ब्रांच ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की अन्य संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया। अधिकारी ने बताया कि ये वीओआईपी कॉलिंग के माध्यम से अमेरिकी नागरिकों को कथित तौर पर निशाना बनाते थे और खुद को ऑनलाइन दवा कंपनी का प्रतिनिधि बताते थे। आरोपी दवाओं का ऑर्डर लेने के बाद दवा नहीं पहुंचाते थे।

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