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Hindi News महाराष्ट्र Rajya Sabha Election: राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं दे सकेंगे अनिल देशमुख और नवाब मलिक, कोर्ट ने खारिज की मांग

Rajya Sabha Election: राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं दे सकेंगे अनिल देशमुख और नवाब मलिक, कोर्ट ने खारिज की मांग

राज्यसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी सरकार को तगड़ा झटका लगा है। 10 जून को होने वाले राज्यसभा चुनावों में उद्धव सरकार को 2 वोटों का बड़ा नुकसान हुआ है। 

Maharashtra Ministers Anil Deshmukh and Nawab Malik - India TV Hindi Image Source : FILE PHOTO Maharashtra Ministers Anil Deshmukh and Nawab Malik 

Highlights

  • महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी सरकार को बड़ा झटका
  • राज्यसभा चुनाव में दो विधायकों को वोटिंग की इजाजत नहीं
  • महाराष्ट्र में राज्यसभा की 6 सीटों पर 10 जून को होंगे चुनाव

Rajya Sabha Election: राज्यसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी सरकार को तगड़ा झटका लगा है। 10 जून को होने वाले राज्यसभा चुनावों में उद्धव सरकार को 2 वोटों का बड़ा नुकसान हुआ है। दरअसल, अनिल देशमुख और नवाब मलिक की राज्यसभा में वोट देने की मांग को कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया है। अब महाविकास आघाड़ी सरकार की ओर से मलिक और देशमुख वोट नहीं दे पाएंगे। 

महाविकास आघाड़ी को झटका

विशेष PMLA कोर्ट ने राज्यसभा चुनाव में वोट डालने के लिए महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री नवाब मलिक और पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में राज्यसभा की 6 सीटों के लिए 10 जून को चुनाव होना है। राज्य की इन 6 सीटों के लिए सात उम्मीदवार मैदान में हैं, इसलिए राज्यसभा चुनाव में 24 साल बाद मतदान कराने की नौबत आ गई है।

महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव का अंकगणित

महाराष्ट्र विधानसभा की 288 सीटों में से भाजपा के पास 106, शिवसेना के पास 55, कांग्रेस के पास 44 और एनसीपी के 53 हैं। जिसमें से 2 विधायक नवाब मलिक और अनिल देशमुख जेल में हैं और कोर्ट ने अब उनकी देने देने की याचिका भी खारिज कर दी है। 

विधायक संख्या के हिसाब से सत्तारूढ़ शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी (राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी) के एक-एक और भाजपा के दो उम्मीदवार आसानी से जीत सकते हैं। लेकिन छठवीं सीट के लिए भाजपा और शिवसेना दोनों ने एक-एक अतिरिक्त उम्मीदवार खड़े कर दिए हैं। यह छठवीं सीट जीतने के लिए भाजपा को अपनी क्षमता से 13 और शिवसेना को उसकी क्षमता से 16 अधिक विधायकों की जरूरत पड़ेगी। चूंकि यह कमी छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों से ही पूरी होनी है, इसलिए छोटे दल और निर्दलीय मिलकर एमवीए गठबंधन की बाहें मरोड़ने में लगे हुए हैं।