वित्त वर्ष 2025-26 खत्म होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। 31 मार्च की डेडलाइन करीब आते ही टैक्स से जुड़े काम निपटाना जरूरी हो जाता है। खासतौर पर अगर आपने क्रिप्टोकरेंसी में निवेश या ट्रेडिंग की है, तो नियमों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। सरकार ने वर्चुअल डिजिटल एसेट्स को लेकर सख्त नियम बनाए हैं, जिनका पालन करना हर निवेशक के लिए जरूरी है।
क्रिप्टो पर कितना लगता है टैक्स?
भारत में क्रिप्टो से होने वाली कमाई पर सीधा 30% टैक्स लगता है। चाहे आपने ट्रेडिंग से मुनाफा कमाया हो, स्टेकिंग रिवॉर्ड मिला हो या माइनिंग से इनकम हुई हो हर स्थिति में यही टैक्स लागू होता है। इसके अलावा हर ट्रांजैक्शन पर 1% TDS भी काटा जाता है। सबसे अहम बात यह है कि क्रिप्टो में हुए नुकसान को आप किसी अन्य आय के साथ एडजस्ट नहीं कर सकते। यानी अगर एक कॉइन में नुकसान और दूसरे में फायदा हुआ, तो टैक्स सिर्फ फायदे वाले हिस्से पर ही देना होगा।
टैक्स की सही गणना कैसे करें?
टैक्स कैलकुलेशन के लिए सबसे पहले अपने सभी ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड तैयार करें। मुनाफे की गणना करते समय आप केवल खरीद कीमत को ही घटा सकते हैं। बिजली, इंटरनेट या अन्य खर्चों की कटौती इसमें नहीं मिलती। इसके अलावा माइनिंग, एयरड्रॉप या टोकन डिस्ट्रीब्यूशन से हुई कमाई को भी शामिल करना जरूरी है।
सही ITR फॉर्म चुनना जरूरी
अगर आप कभी-कभार निवेश करते हैं, तो ITR-2 फॉर्म भर सकते हैं। वहीं, अगर आप नियमित ट्रेडिंग करते हैं या इसे बिजनेस की तरह चलाते हैं, तो ITR-3 फॉर्म भरना होगा। अब ITR में Schedule VDA सेक्शन भी दिया गया है, जहां हर क्रिप्टो ट्रांजैक्शन की जानकारी देना अनिवार्य है।
TDS और Form 26AS जरूर मिलाएं
हर ट्रांजैक्शन पर कटने वाले 1% TDS का रिकॉर्ड रखना बेहद जरूरी है। यह सुनिश्चित करें कि आपका टीडीएस फॉर्म 26AS में सही तरीके से दिख रहा है। अगर इसमें कोई गड़बड़ी हुई, तो आयकर विभाग आपसे जवाब मांग सकता है।
डेडलाइन से पहले क्या करें?
- सभी एक्सचेंज और वॉलेट्स से ट्रांजैक्शन रिपोर्ट डाउनलोड करें
- फॉर्म 26AS में TDS चेक करें
- इनकम को सही कैटेगरी में रखें
- सभी डॉक्यूमेंट और रसीदें संभाल कर रखें
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