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'चुनावों के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने की कोई योजना नहीं', सरकार ने अफवाहों को किया खारिज

सरकार ने स्पष्ट किया है कि विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने की कोई योजना नहीं है। अफवाहों को खारिज करते हुए कहा गया कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार है। लोगों से केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की गई, क्योंकि पैनिक बाइंग की स्थिति बनी।

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Image Source : PTI REPRESENTATIONAL लोगों ने कई जगह 'पैनिक बाइंग' की है।

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है। सरकार ने उन अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक प्रेस वार्ता में कहा, 'पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।' उन्होंने यह बयान पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों के असर पर पूछे गए सवाल के जवाब में दिया।

'अफवाहों के चलते कई जगह पैनिक बाइंग'

सुजाता शर्मा ने यह भी साफ किया कि चुनाव खत्म होने के बाद कीमतें बढ़ने की जो अफवाहें फैलाई जा रही हैं, वे गलत हैं और इसी वजह से कुछ जगहों पर लोगों ने जरूरत से ज्यादा खरीदारी (पैनिक बाइंग) शुरू कर दी है। सरकार के अनुसार कुछ राज्यों, खासकर आंध्र प्रदेश में, कीमत बढ़ने की अफवाहों के कारण लोगों ने बड़ी मात्रा में ईंधन खरीदना शुरू कर दिया, जिससे कई पेट्रोल पंपों पर स्टॉक खत्म होने की स्थिति बन गई। रिपोर्ट के मुताबिक रविवार को 400 से अधिक पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म हो गया था। कुछ स्थानों पर मांग में 30 से 33 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई।

'केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें'

सरकार ने कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और विमान ईंधन (ATF) सभी का पर्याप्त भंडार मौजूद है और आपूर्ति लगातार जारी है। अधिकारियों ने बताया कि सभी पेट्रोल पंपों की निगरानी की जा रही है और जिन जगहों पर अधिक मांग है, वहां सप्लाई को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि किसी तरह की कमी न हो। सुजाता शर्मा ने लोगों से अपील करते हुए कहा, 'हमारे पास पर्याप्त मात्रा में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल उपलब्ध है। कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। लोगों से अनुरोध है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।'

तेल विपणन कंपनियों पर वित्तीय दबाव भी बढ़ा

हालांकि, इस बीच तेल विपणन कंपनियों पर वित्तीय दबाव भी बढ़ा है। बताया जा रहा है कि सरकारी ईंधन कंपनियां बाजार मूल्य से कम कीमत पर पेट्रोल और डीजल बेच रही हैं, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। कुछ अनुमानों के अनुसार यह नुकसान करीब 2,400 करोड़ रुपये प्रतिदिन तक पहुंच सकता है। विशेषज्ञों ने पहले आशंका जताई थी कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और घरेलू-वैश्विक दामों के बीच बढ़ते अंतर के कारण चुनाव के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 25 से 28 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि सरकार ने इन सभी अटकलों को खारिज कर दिया है।

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