ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आम लोगों की जेब पर भी साफ दिखाई दे रहा है। खासकर अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में अचानक आई तेज बढ़ोतरी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हालात ऐसे हो गए हैं कि कुछ ही हफ्तों में ईंधन के दाम करीब 50% तक बढ़ गए हैं। इससे न सिर्फ आम जनता बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। जानकारों का कहना है कि अगर यह संकट लंबा खिंचा, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें पिछले चार साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। हाल ही में एक गैलन पेट्रोल की कीमत 4.5 डॉलर के करीब दर्ज की गई, जो 2022 के बाद का सबसे बड़ा उछाल है। सिर्फ एक हफ्ते में ही कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने लोगों को झटका दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा कारण
दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल की सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य से होती है। मौजूदा तनाव के कारण यहां से तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई टैंकर फंस गए हैं, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कमी बढ़ गई है और कीमतें तेजी से ऊपर चली गई हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि तेल की मांग और सप्लाई के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है। अमेरिका द्वारा ईरानी तेल निर्यात पर रोक लगाने और युद्ध के चलते बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। यही वजह है कि पेट्रोल की कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिल रहा है।
आम जनता पर बढ़ा बोझ
ईंधन महंगा होने का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है। ट्रांसपोर्ट महंगा होता है, जिससे खाने-पीने और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें भी बढ़ जाती हैं। अमेरिका में भी अब महंगाई का दबाव बढ़ने लगा है और लोग इसका विरोध कर रहे हैं। अगर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो पेट्रोल की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस संकट पर टिकी है, क्योंकि इसका असर हर देश और हर व्यक्ति तक पहुंच सकता है।
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