दुनिया भर में आर्थिक असमानता कम होने की बजाय लगातार बढ़ती जा रही है। अमीर और गरीब देशों के बीच की खाई अब और गहरी होती दिख रही है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की ताजा रिपोर्ट ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, विकसित देशों ने गरीब देशों को मिलने वाली आर्थिक मदद में बड़ी कटौती की है, जिससे वैश्विक संतुलन बिगड़ता नजर आ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 25 विकसित देशों ने पिछले साल गरीब देशों को दी जाने वाली मदद में 23% की कटौती की है। खास बात यह है कि सिर्फ पांच बड़े देशों की कटौती इस गिरावट के 96% के लिए जिम्मेदार है। इनमें सबसे बड़ी कटौती अमेरिका की ओर से की गई, जो करीब 59% तक रही।
गरीब देशों पर बढ़ता दबाव
इस सहायता में कमी का सबसे ज्यादा असर गरीब और विकासशील देशों पर पड़ा है। अफ्रीकी देशों को मिलने वाली मदद में 26.3% की गिरावट आई है, जबकि सबसे कम विकसित देशों में यह गिरावट 25.8% रही। इससे स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आपदा राहत जैसे जरूरी क्षेत्रों पर संकट गहराने का खतरा बढ़ गया है।
निर्यात पर बढ़ा बोझ
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि गरीब देशों से होने वाले निर्यात पर लगने वाला औसत टैरिफ 9% से बढ़कर 28% तक पहुंच गया है। इससे इन देशों की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है और उनके विकास की रफ्तार धीमी हो सकती है।
दो बड़े कारण बने जिम्मेदार
इस बढ़ती असमानता के पीछे कई कारण हैं। पहला, वैश्विक तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों ने निवेश के माहौल को कमजोर किया है। इससे आर्थिक सुधार की उम्मीदों को झटका लगा है। दूसरा, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं ने गरीब देशों की अर्थव्यवस्था को और नुकसान पहुंचाया है, जिससे उनकी स्थिति और खराब हुई है।
सेविले प्रतिबद्धता अधूरी
स्पेन के सेविले में कई देशों ने विकास के लिए हर साल 4000 अरब डॉलर की कमी को पूरा करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस प्रगति नहीं हो पाई है। यह भी इस समस्या को बढ़ाने का एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
कुछ देशों ने निभाई जिम्मेदारी
हालांकि इस मुश्किल समय में कुछ देशों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई है। नॉर्वे, लक्जमबर्ग, स्वीडन और डेनमार्क जैसे देशों ने संयुक्त राष्ट्र के 0.7% GNI लक्ष्य को पूरा किया है।
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