चंद महीनों में पकड़ा ₹700 करोड़ का MD ड्रग, 491 आरोपी गिरफ्तार, 170 एकड़ जमीन पर चल रहा था काला कारोबार
पुलिस ने बताया कि अलग-अलग टीमें बनाकर कई राज्यों में छापेमारी की गई और नशे के कारोबार में शामिल लोगों को गिरफ्तार किया गया। आने वाले समय में भी कार्रवाई जारी रहेगी।

राजस्थान के जयपुर में पुलिस ने कुछ महीनों के अंदर 700 करोड़ रुपये का एमडी ड्रग पकड़ा है। नशे के खिलाफ विशेष टीम का गठन होने के बाद से लगातार ड्रग तस्करों पर कार्रवाई की जा रही है। इस साल ड्रग तस्करों के खिलाफ 333 मामले दर्ज किए गए हैं। 491 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और भारी मात्रा में मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं। पुलिस ने लगभग 248 किलो अफीम, 13 हजार किलो से ज्यादा डोडा चूरा, 265 ग्राम स्मैक, 185 किलो एमडी, 301 किलो गांजा और 31 हजार से ज्यादा गांजे के पौधे बरामद किए हैं।
36 हजार से ज्यादा अवैध टैबलेट्स। करोड़ों रुपये के केमिकल और नशा बनाने में इस्तेमाल होने वाला सामान भी जब्त किया गया है। पुलिस ने 170 एकड़ जमीन पर अवैध मादक पदार्थ की खेती भी पकड़ी है। इस जमीन पर करीब साढ़े 7 लाख अफीम के पौधे मिले, जिनसे 519 किलो अफीम फल और 202 किलो डोडा चूरा बरामद हुआ। इसकी अनुमानित कीमत करीब 484 करोड़ रुपये बताई गई। ये आंकड़े साफ बता रहे हैं कि नशे के कारोबार पर अब शिकंजा लगातार कस रहा है और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स राजस्थान की कार्रवाई अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने में बड़ी भूमिका निभा रही है।
हर ऑपेरशन का अलग कोड नेम
आईजी विकाश कुमार ने बताया कि राजस्थान में धीरे-धीरे नशे का कारोबार विकसित होता गया और पड़ोसी राज्यों में एमडी ड्रग्स सप्लाई हो रहा है, जिसको एएनटीएफ रोक रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश का शायद ये पहला ऐसा विभाग है, जहां हर एक ऑपरेशन का एक अलग कोड नेम होता है। आईजी ने बताया कि हर एक ऑपरेशन का अलग कोड नेम है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि ऑपरेशन में शामिल अधिकारियों के नाम गुप्त रखे जा सकें।
बड़े सरगना तक पहुंचने का लक्ष्य
सरकार ने नशामुक्त राजस्थान बनाने के लिए ये एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया है। आईजी विकाश कुमार के अनुसार 700 करोड़ का एमडी ड्रग सिर्फ एएनटीएफ की कार्रवाई में पकड़ा गया है। इसके अलावा भी राजस्थान में नशे के कारोबार को खत्म करने के लिए काम हो रहा है। पुलिस का लक्ष्य आरोपियों को पकड़ना और बड़े सरगना तक पहुंचने का है। पुलिस के अनुसार एमडी ड्रग्स एक केमिकल फॉर्म है। राजस्थान में अफीम बेस्ड नशा रहा है। पश्चिमी राजस्थान में नशे का कारोबार बड़े स्तर पर सिंथेटिक ड्रग का हो रहा था। युवा वर्ग इस चपेट में जा रहा था।
युवाओं में एमडी की लत ज्यादा
पुलिस अधिकारी ने बताया कि एमडी ड्रग का चलन अब राजस्थान में बड़े स्तर पर है। एमडी नया फेनोमीना है, जिसका चलन ज्यादा है। राजस्थान इसका मुख्य केंद्र बन रहा था। पश्चिमी राजस्थान और अन्य इलाकों में बड़े पैमाने पर नशे की फैक्ट्री लग रही थी। महाराष्ट्र वगैरह से पहले कच्चा माल आता था। इसके बाद यहां ही सारा माल बनाया जाने लगा। तस्कर बड़ी फैक्ट्री लगाने लगे। एमडी बनाना आसान था। मुनाफा ज्यादा था। युवा वर्ग ज्यादा मंगाता था। पुलिस ने 30 से ज्यादा फैक्ट्री राजस्थान में पकड़ी हैं। सिर्फ 6 महीने में 20-22 फैक्ट्री पकड़ी गई हैं। इसकी खपत पड़ोसी राज्यों में ज्यादा थी।
हैदराबाद से कच्चा माल ला रहे तस्कर पकड़े
पुलिस अधिकारी ने बताया कि उन्होंने हाल में ही बड़ा ऑपरेशन किया था। ऑपरेशन विश्वाहिनी में हैदराबाद से कच्चा माल टैंकर में छिपाकर ला रहे तस्करों को पकड़ा। इस माल से 18 करोड़ की एमडी बन सकती थी। इसे 4 राज्यों में सप्लाई होना था। अब पुलिस की नजर गोवा पर है, जहां से तस्कर पकड़े जाएंगे। एमडी के कारोबार को पुलिस ने बड़े स्तर पर ध्वस्त किया है। 550 बड़े तस्कर पकड़े गए हैं। 60 बड़े इनामी तस्कर पकड़े गए हैं। इन तस्करों को पश्चिम बंगाल, दिल्ली, हरियाणा, मध्यप्रदेश और गुजरात से पकड़ कर लाया गया है।
क्यों रखे खास कोड नेम?
ऑपरेशन के खास कोड नेम रखे गए हैं। डेल्टा, विक्टर, सैमसन, रुद्र नाम की टीमें बनाई गई हैं, जो अलग-अलग जगह काम कर रही हैं। ये नाम इसलिए रखे गए हैं, ताकि कोई समझ ना पाये और गोपनीयता बनी रहे। अपराधी की पूरी क्राइम कुंडली का एनालिसिस कर के ये नाम रखे जाते हैं। विषवाहिनी, विषबानु, जेंटल-मेंटल, 7th हेवन, जलालुद्दीन, स्क्वायर पिरामिड, गुरुग्राम, खंगार जैसे नाम रखे गए हैं। पुलिस ने पहले टेक्निकल डेवलपमेंट कर तस्करों को ट्रेस किया कि वह कहां जाते हैं, लोकेशन कब और कैसे बदलते हैं। इसे ट्रेस करने के बाद बड़ी प्रशिक्षित टीम बनाई गई और धावा बोलकर अपराधियों को पकड़ा है।
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