हिंदू धर्म में हर माह की अमावस्या की तिथि का अलग-अलग महत्व है, लेकिन भाद्रपद माह की अमावस्या का विशेष महत्व है। इसे कुशग्रहणी अमावस्या या पिठोरी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस दिन पितरों के तर्पण, श्राद्ध का विधान है। ऐसे में लोगों को कंफ्यूजन हो रही है कि तारीख को लेकर लोगों में कंफ्यूजन बनी हुई है, तो आइए जानते हैं इसकी सही डेट...
भाद्रपद अमावस्या शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के मुताबिक, इस साल भाद्रपद अमावस्या की तिथि 22 अगस्त को सुबह 11.55 बजे आरंभ हो रही है, जो 23 अगस्त के दिन 11.35 बजे खत्म होगी। हिंदू धर्म में उदया तिथि की मान्यता है, ऐसे में भाद्रपद अमावस्या 23 अगस्त दिन शनिवार को मनाई जाएगी।
भाद्रपद अमावस्या का महत्व
भाद्रपद अमावस्या को कुशग्रहणी अमावस्या भी कहते हैं। मान्यता है इस दिन इकट्ठा की गई कुश को बेहद पवित्र माना जाता है। इसी दिन महिलाएं अपनी संतान के दीर्घायु जीवन और सुख-समृद्दि के लिए पिठोरी अमावस्या का व्रत रखती हैं। व्रत के दौरान महिलाएं आटे से चौंसठ योगिनियों की प्रतिमाएं बनाकर उनकी पूजा भी करती हैं।
पितृ पूजा मंत्र
- ॐ पितृ गणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्।
- ॐ आद्य-भूताय विद्महे सर्व-सेव्याय धीमहि। शिव-शक्ति-स्वरूपेण पितृ-देव प्रचोदयात्:।।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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