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Hindi News धर्म रीढ़ की हड्डी में गैप का कारण सिर्फ बढ़ती उम्र नहीं, इन दो ग्रहों का मेल बिगाड़ सकता है सेहत का संतुलन!

रीढ़ की हड्डी में गैप का कारण सिर्फ बढ़ती उम्र नहीं, इन दो ग्रहों का मेल बिगाड़ सकता है सेहत का संतुलन!

Planetary Impact on Spine: रीढ़ की हड्डी न केवल फिजिकल बैलेंस बनाए रखती है, बल्कि मानसिक ऊर्जा का केंद्र भी है। ज्योतिष के अनुसार, रीढ़ का निचला हिस्सा शनि, मंगल और केतु से जुड़ा है। जब इन ग्रहों में टकराव होता है, तो व्यक्ति को कमर दर्द, स्पाइनल गैप जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

Spine astrology, - India TV Hindi Image Source : FREEPIK रीढ़ दर्द के ज्योतिषीय कारण

Planetary Impact on Spine: रीढ़ की हड्डी को मानव शरीर का आधार स्तंभ कहा जाता है। यह न केवल शरीर की संरचना को संभालती है, बल्कि ऊर्जा प्रवाह और मानसिक संतुलन से भी जुड़ी होती है। ज्योतिषियों और वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर के इस भाग पर ग्रहों का सीधा असर पड़ता है। खासतौर पर शनि, मंगल और केतु जब अशुभ स्थिति में होते हैं, तो ये रीढ़ की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं।

इन तीनों ग्रहों के टकराव के कारण व्यक्ति को पीठ से जुड़ी समस्याएं जैसे कमर दर्द, झुकाव और स्पाइनल गैप जैसी परेशानियां होने लगती है। इस तरह की समस्याएं होने पर सबसे पहले डॉक्टर को जरूर दिखाएं। साथ ही अपने ज्योतिष से सलाह लेना न भूलें। यहां जानिए क्यों होती है स्पाइनल गैप की दिक्कत और इसे दूर करने के उपाय क्या है। 

शनि और मंगल का संबंध

शनि हड्डियों का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि मंगल शरीर की मांसपेशियों और ऊर्जा का। जब इन दोनों में विरोध या दृष्टि संबंध बनता है, तब रीढ़ के निचले हिस्से में तनाव या दर्द उत्पन्न होता है। विशेष रूप से यदि ये ग्रह 6, 8 या 12वें भाव से जुड़े हों, तो 'Lower Back Stress' की स्थिति बन सकती है।

आठवां और बारहवां भाव का असर

आठवां भाव शरीर के जोड़ और हड्डियों से जुड़ा होता है। यदि यहाँ शनि, मंगल या राहु पीड़ित हों, तो रीढ़ में विकार संभव है। वहीं बारहवां भाव शरीर के निचले हिस्से का प्रतीक है। यहाँ केतु की उपस्थिति टेलबोन दर्द या सैक्रल एरिया में गैप का कारण बनती है।

केतु और नक्षत्रों का प्रभाव

केतु 'रिक्तता' का ग्रह है। जब यह लग्न, आठवें या बारहवें भाव से जुड़ता है, तो रीढ़ में स्पेस या खालीपन का संकेत देता है। शतभिषा, मूल और अश्विनी नक्षत्रों में शनि या केतु की स्थिति रीढ़ की असंतुलन स्थितियों को और बढ़ाती है।

राहत और उपाय

  • शनि दोष के लिए: शनिवार को तिल का तेल अर्पित करें और पीपल के नीचे जल चढ़ाएं।
  • मंगल के लिए: मंगलवार को गुड़ और मसूर दान करें।
  • केतु दोष के लिए: नारियल दान करें और गणपति की उपासना करें।
  • योगिक उपाय: सेतुबंधासन, भुजंगासन और शशांकासन रीढ़ को मजबूती देते हैं और रक्त प्रवाह बढ़ाते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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