ऑस्ट्रेलिया को उसी की सरजमीं पर टेस्ट सीरीज 2-1 से हराने में भारतीय विकेट कीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत का अहम रोल रहा है। ब्रिसबेन टेस्ट में उन्होंने 89 रन की नाबाद पारी खेलकर टीम इंडिया को जीत दिलाई थी। इसके अलावा उन्होंने सिडनी में भी 97 रन की शानदार पारी खेली थी। विदेशी सरजमीं पर पंत की बल्लेबाजी तो शानदार रहती है, लेकिन उनकी विकेट कीपिंग पर फिर भी सवाल उठते रहते हैं।
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ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज के पहले मुकाबले में पंत से ऊपर ऋद्धिमान साहा को मौका दिया गया था। उस टेस्ट में साहा ने विकेट कीपिंग तो अच्छी की लेकिन वह बल्लेबाजी में फेल हो गए। ऐसे में भारत ने पंत को दूसरे टेस्ट में साहा की जगह मौका दिया और इस खिलाड़ी ने पूरी सीरीज में 68.50 की औसत से 274 रन बनाए। भारत की ओर से वह इस सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे।
पंत की विकेट कीपिंग पर जब उनके साथी ऋद्धिमान साहा से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि कोई भी पहली क्लास में अलजेब्रा नहीं सीखता। आप हमेशा एक-एक कदम आगे बढ़ते हैं।
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पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में साहा ने कहा "कोई भी पहली क्लास में अलजेब्रा नहीं सीखता। आप हमेशा एक-एक कदम आगे बढ़ते हैं। पंत अपना सर्वश्रेष्ठ कर रहा है और निश्चित रूप से सुधार (विकेटकीपिंग) करेगा। उसने हमेशा परिपक्वता दिखाई है और खुद को साबित किया है। लंबे समय के लिए यह भारतीय टीम के लिए अच्छा है। उन्होंने कहा कि वनडे और टी-20 फॉर्मेट से बाहर होने के बाद उसने जो जज्बा दिखाया वह वास्तव में असाधारण है।"
ब्रिसबेन टेस्ट में पंत चौका लगाकर विनिंग शॉट खेला था और सीरीज भारत को जिताई थी। उनके इस अंदाज को देखते हुए फैन्स ने एक बार उनकी तुलना धोनी से कर दी थी। इस बात पर साहा ने कहा कि 'धोनी, धोनी ही रहेंगे और हर किसी की अपनी पहचान होती है।'
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जब भी दो खिलाड़ी एक स्थान के लिए खेल रहे होते हैं तो उनके बीच मनमुटाव होना आहम है, लेकिन साहा ने कहा कि पंत के साथ उनका ऐसा कुछ नहीं है।
साहा ने कहा ''आप पंत से पूछ सकते हैं, हमारा रिश्ता मैत्रीपूर्ण है और हम दोनों प्लेइंग इलेवन में जगह बनाने वालों की मदद करते हैं। व्यक्तिगत तौर पर हमारे बीच कोई मनमुटाव नहीं है। मैं इसे नंबर एक और दो के तौर पर नहीं देखता। जो अच्छा करेगा टीम में उसे मौका मिलेगा। मैं अपना काम करता रहूंगा। सिलेक्शन मेरे हाथ में नहीं है, यह मैनेजमेंट पर निर्भर करता है।"
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