Viral Video : भारत में कई जगहों पर आपने देखा होगा कि नाश्ते को अखबार—मैग्जीन समेत कई तरह के कागजों पर दिया जाता है। खासकर जब आप किसी वेंडिग जोन में हों। इन दिनों एक भेलपुड़ी स्टॉल की फोटो काफी चर्चा में है। दरअसल, एक व्यक्ति द्वारा सड़क किनारे भेलपुड़ी का ऑर्डर दिया गया। जब उसे भेलपुड़ी मिली तो देखा कि उसके कोन को 2 पन्नों वाले बैंक स्टेटमेंट से बनाया गया था। हालांकि, यूजर्स तब और भड़क गए जब उनको पता चला कि, दो पन्नों में बैंक यूजर की लेनदेन समेत सारी निजी जानकारी लिखी हुई थी।
एक्स पर फोटो हुई वायरल
एक्स पर इस पोस्ट को @Sudhanshu1414 नामक हैंडल से शेयर किया गया था। सुधांशु अम्भोरे ने इसे शेयर करते हुए लिखा, 'मैंने एक स्ट्रीट वेंडर से 20 रुपये का भेल खरीदा और वो किसी के दो पन्नों के बैंक स्टेटमेंट में लिपटा हुआ था। नाम, खाता संख्या, लेन-देन... सब कुछ ऐसे ही खुला हुआ था जैसे सामान्य बात हो। भारत में प्राइवेसी सचमुच एक मजाक है। आरोप है कि दस्तावेज़ में खाताधारक का नाम, खाता संख्या और लेन-देन का इतिहास सहित संवेदनशील ग्राहक जानकारी प्रदर्शित की गई थी।'
यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया
इस फोटो ने तुरंत सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान आकर्षित किया, जिनमें से कई लोगों ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि गोपनीय बैंकिंग दस्तावेजों का इस्तेमाल सड़क किनारे विक्रेताओं द्वारा डिस्पोजेबल पैकेजिंग सामग्री के रूप में कैसे किया जा सकता है। साथ ही, इस घटना ने स्ट्रीट फूड पैकेजिंग से जुड़े स्वच्छता मानकों के बारे में चिंताओं को फिर से हवा दे दी। एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'मैंने सुना है कि मेडिकल रिपोर्ट्स के साथ भी ऐसा होता है। शायद हमें भेल पूरी भैयाओं को भी रॉ एजेंट के रूप में भर्ती करना शुरू कर देना चाहिए।' दूसरे ने लिखा कि, 'मैं कुछ खोज रहा था, और मुझे एक पूरे जोन के यूनियन बैंक के कर्मचारियों के पिछले कुछ वर्षों के वेतन का विवरण मिल गया।' सभी ने सिर्फ गोपनीयता के पहलू पर ही ध्यान नहीं दिया। एक यूजर ने स्नैक के बारे में ही मजाक करते हुए टिप्पणी की, 'जानकारी के लिए बता दूं: यह भेल बिल्कुल नहीं है। यह तो बस कुछ मुरमुरे + बिस्किट है। उस विक्रेता ने आपको धोखा दिया है।' एक यूजर ने लिखा कि, 'मुझे इस बात की अच्छी जानकारी है और मैं पुष्टि कर सकता हूं कि यह विवरण शाखा में तैयार नहीं किया जाता है। यह विवरण खाताधारक द्वारा मोबाइल एप्लिकेशन/इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से तैयार किया जाता है और पीडीएफ के रूप में डाउनलोड किया जाता है। शाखाओं द्वारा दिया गया विवरण इससे बिल्कुल अलग दिखता है।' कुछ यूजर ने संभावित धोखाधड़ी के जोखिमों के बारे में भी चिंता व्यक्त की। एक टिप्पणी में लिखा था, 'अगर किसी के पास किसी व्यक्ति के बारे में इस तरह की जानकारी हो तो धोखाधड़ी का शिकार होने की कितनी संभावना है? जागरूकता के लिए यह एक गंभीर प्रश्न है।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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