Amazing Facts : आपने अक्सर उन लोगों को देखा होगा जो हर वक्त च्युइंग गम और बबल गम चबाते हैं। आजकल तो पान—मसाला और सिगरेट जैसी बुरी आदतों से निजात पाने के लिए भी लोग च्युइंग गम और बबल गम चबाया करते हैं। हालांकि, कई लोग तो कूल डूड बनने के लिए भी हर समय च्युइंग गम और बबल गम चबाते हैं। च्युइंग गम और बबल गम खाते लोगों को देखकर क्या आपने कभी ये सोचा है कि, च्युइंग गम और बबल गम में क्या अंतर है ? आमतौर पर ग्राहक और अन्य लोग च्युइंग गम और बबल गम दोनों को एक ही समान मान लेते हैं जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। आज हम आपको बता दें कि, च्युइंग गम और बबल गम में क्या अंतर है ?
च्युइंग गम और बबल गम क्यों चबाए जाते हैं
कई लोगों का मानना होता है कि, च्युइंग गम और बबल गम चबाना मुंह को यथासंभव स्वच्छ रखने का विकल्प है। च्युइंग गम ने इस कमी को कुछ हद तक पूरा किया और विभिन्न संस्कृतियों में इसका मुख्य उद्देश्य दांतों को साफ करना, सांसों को ताजा करना और ओरल केयर को बढ़ावा देना था। कई लोग तो इसे भोजन के बाद दांतों के बीच फंसे भोजन के टुकड़ों को निकालने के लिए चबाते हैं। popsci कर रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन के अनुसार शुगर-फ्री गम से मुस्कान को कुछ लाभ मिल सकते हैं। हालांकि इसका अधिक सेवन करने से जबड़े की बीमारी हो सकती है।
च्युइंग गम और बबल गम में अंतर
sciencedirect की रिपोर्ट के मुताबिक, च्युइंग गम का उपयोग मुंह साफ करने और सांसों को ताजा करने के लिए किया जाता है, जबकि बबल गम एक प्रकार का लचीला गोंद है जिसे मुंह से बुलबुले की तरह बाहर निकालने के लिए बनाया गया है। च्युइंग गम में एक गोंद का बेस होता है जिस पर परत चढ़ी हो भी सकती है और नहीं भी। उस परत में मिठास, स्वाद बढ़ाने वाले पदार्थ, रंग और फलों के अम्ल हो सकते हैं। च्युइंग गम और बबल गम में मुख्य अंतर बुलबुले बनाने की क्षमता है, क्योंकि बबल गम में च्युइंग गम की तुलना में गम बेस की मात्रा अधिक होती है। बबल गम और च्युइंग गम दोनों ही आमतौर पर मीठे होते हैं और कई कंपनियां इनमें फ्लेवरिंग एजेंट भी मिलाती हैं। च्युइंग गम के मुख्य फ्लेवर स्पीयरमिंट और पेपरमिंट हैं। हालांकि, तरबूज और मुलेठी जैसे अन्य फ्लेवर भी उपलब्ध हैं। आमतौर पर च्युइंग गम की तुलना में बबल गम के अधिक फ्लेवर उपलब्ध होते हैं, जैसे स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी या अंगूर।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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