Amazing Facts : भोजन की बात आती है तो आमतौर पर दो तरह के लोग स्पॉट किए जाते हैं। इस कैटेगरी में पहले तो शाकाहारी लोग आते हैं फिर दूसरे आते हैं मांसाहारी लोग जिन्हें नॉनवेजिटेरियन कहते हैं। ज्यादातर नॉनवेजिटेरियन चिकन या मटन खाना पसंद करते हैं। इनके भोजन की पूर्ति करने के लिए देश भर के अलग—अलग हिस्सों में चिकन और मटन की सप्लाई होती है। हालांकि, स्थानीय जगहों पर चिकन और मटन की सप्लाई के लिए भी कुछ स्थान हैं। जैसे चिकन और अंडों की सप्लाई तो पोल्ट्री फार्म से हो जाती है मगर क्या आपको पता है कि मटन यानी बकरे की सप्लाई कहां से होती है ? एक तरह से देखा जाए तो हम उस स्थान विशेष की बात कर रहे हैं जहां पर बकरे—बकरी रखे जाते होंं। कई लोग मटन खाते तो बड़े चाव से हैं मगर उन्हें इस बारे में नहीं पता होता कि, बकरों को रखने वाली जगह को क्या कहते हैं ?
पोल्ट्री फार्म कितने क्षेत्र में होता है
गौरतलब है कि, पोल्ट्री फार्म गांवों में एक बिजनेस मॉडल की तरह देखा जाता है। गांवों में इसका ट्रेंड इसलिए बढ़ता जा रहा है क्योंकि ये कम लागत में खुलने वाला बड़ा बिजनेस है। पोल्ट्री फार्म के लिए जगह का चयन मुर्गियों की संख्या पर निर्भर करता है। छोटे स्तर (500-1000 मुर्गी) के लिए लगभग 1000-2000 वर्ग फुट, जबकि बड़े व्यावसायिक फार्म के लिए 1 एकड़ या अधिक जमीन की आवश्यकता होती है। आम तौर पर, हर 1000 मुर्गियों के लिए लगभग 1000-1500 वर्ग फुट शेड की जगह पर्याप्त मानी जाती है।
मटन की सप्लाई कहां से होती है
पोल्ट्री फॉर्म से चिकन तो मटन कहां से आता है ? ये सवाल अगर आपके मन में भी आता है तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे। दरअसल, जिस तरह मुर्गी को पोल्ट्री फॉर्म से सप्लाई किया जाता है ठीक उसी प्रकार से बकरे को 'गोट फार्म (Goat Farm)' से सप्लाई किया जाता है। गोट फार्म उस स्थान को कहते हैं जहां पर बकरे और बकरियों का संरक्षण किया जाता है। ये जगह उन्हीं लोगों के पास होती है जो बकरी पालन का काम करते हैं।
कितना बड़ा होता है गोट फार्म
गोट फार्म का आकार आपकी बकरियों की संख्या और पालन पद्धति पर निर्भर करता है। एक मानक व्यावसायिक फार्म के लिए, 100 बकरियों के लिए लगभग 1.5 एकड़ (65,000 वर्ग फुट से अधिक) जमीन की आवश्यकता होती है, जिसमें शेड और चरने की जगह शामिल है। छोटे स्तर पर, 50 बकरियों के लिए 20-30 वर्ग मीटर का बंद शेड पर्याप्त होता है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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