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ट्रेनों के कोच का रंग लाल, हरा और नीला क्यों होता है, वजह सुनकर यकीन करना मुश्किल; जानिए जवाब

 Written By: Shaswat Gupta
 Published : May 08, 2026 12:17 pm IST,  Updated : May 08, 2026 01:44 pm IST

Railway Facts : सोशल मीडिया पर आपने भारतीय रेलवे से जुड़े कई अनोखे और अनसुने फैक्ट्स के बारे में पढ़ा होगा। मगर, क्या आपने कभी सोचा है कि ट्रेनों के कोच का रंग लाल, हरा और नीला क्यों होता है ?

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विविध रंगों में भारतीय ट्रेन। Image Source : INDIANRAILINFO

Railway Facts : भारतीय रेलवे देशहित और यात्रीहित में हर प्रकार से अभूतपूर्व कार्य कर रहा है। चाहे वो विद्युतीकरण हो या कुशल संचालन या उन्नत तकनीकों का उपयोग रेलवे बेहतरी के लिए किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं है। इन दिनों रेलवे ने ट्रेनों के पुराने कोच के रख-रखाव और नई ट्रेनों के संचालन का काम शुरू किया है। नई ट्रेनों के संचालन की बात करें तो हाल ही में भारतीय रेलवे वंदे भारत और अमृत भारत जैसी ट्रेनों की शुरुआत की है। वहीं, अगर पुराने कोचों के रख-रखाव की बात करें तो रेलवे पुराने हो चुके कोच को डेंटिंग-पेंटिंग के साथ एक नए कलेवर में प्रस्तुत कर रहा है। यदि आपने ट्रेनों के रंग पर गौर किया हो तो आपको पता होगा कि कई ट्रेनों के कोच लाल, हरे और नीले होते हैं। आखिर ऐसा करने के पीछे क्या वजह हो सकती है ? आज हम आपको इसी के बारे में बताने वाले हैं। हालांकि ट्रेनों के कई रंगों काफी साल पहले बंद कर दिया गया था और हर 20-25 साल पर इनको बदला जाता है। मगर पहले जो भी रंग ट्रेनों के हुआ करते थे उनके बारे में हम आज आपको बताएंगे।

ट्रेनों के कोच लाल रंग के क्यों होते हैं 

लाल या जंग लगे रंग के डिब्बे आमतौर पर वातानुकूलित श्रेणी जैसे एसी चेयर कार या एसी स्लीपर को दर्शाते हैं। यह रंग यात्रियों को प्लेटफार्म पर प्रीमियम सेवाओं को तुरंत पहचानने में मदद करता है। लाल रंग आराम और उच्च स्तरीय यात्रा का प्रतीक है, जो बेहतर सुविधाओं की तलाश करने वालों के लिए एक दृश्य संकेत है। इन डिब्बों में अक्सर मानक नीले डिब्बों की तुलना में बेहतर आंतरिक साज-सज्जा और सुविधाएं होती हैं। 

ट्रेनों के कोच हरे रंग के क्यों होते हैं 

गौरतलब है कि, हरे रंग के डिब्बे आमतौर पर गरीब रथ ट्रेनों और कुछ विशेष सेवाओं के लिए आरक्षित होते हैं। गरीब रथ ट्रेनें किफायती और वातानुकूलित यात्रा प्रदान करती हैं, और हरे रंग को मितव्ययिता और सुलभता का प्रतीक माना गया है। इससे ये ट्रेनें नियमित ट्रेनों से आसानी से अलग दिखती हैं और उन यात्रियों के लिए एक किफायती विकल्प का संकेत देती हैं जो अधिक खर्च किए बिना आराम चाहते हैं। हरा रंग रेलवे नेटवर्क में ताजगी और आधुनिकता का भी एहसास कराता है।

ट्रेनों के कोच का रंग नीला क्यों होता है 

नीले रंग के कोच वाली ट्रेन में इन डिब्बों का उपयोग मुख्य रूप से स्लीपर और सामान्य डिब्बों के लिए किया जाता है, जो लंबी दूरी की ट्रेनों का एक बड़ा हिस्सा बनाते हैं। इस रंग को आधुनिकीकरण के प्रयासों के तहत पुराने मैरून रंग को बदलने के लिए अपनाया गया था। नीला रंग बिना वातानुकूलित यात्रा का प्रतीक है और किफायती और सुलभ होने से जुड़ा है। यह रंग यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों, विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले प्लेटफार्मों पर, उनकी आसान पहचान में भी सहायक होता है। समय के साथ, नीला रंग भारतीय रेलवे की नियमित सेवाओं की पहचान बन गया है।

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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