Kedarnath Porter Video : उत्तराखंड के पवित्र केदारनाथ धाम की यात्रा के दौरान एक वायरल वीडियो ने सोशल मीडिया को हिला दिया है। वीडियो में एक शख्स पिट्ठू (मानव पोर्टर) की पीठ पर सवार होकर चढ़ाई कर रहा है, जबकि पिट्ठू भारी वजन के बोझ तले पहाड़ी रास्ते पर संघर्ष कर रहा है। वीडियो देखकर यूजर्स ने सवार व्यक्ति पर गुस्सा जताया तो कुछ ने मजदूर की अथक मेहनत देखकर आंखें नम कर लीं। यह वीडियो हजारों-लाखों लोगों तक पहुंचा और #KedarnathPitthu जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे और पिट्ठू को बैन करने की मांग करने लगे ताकि मजदूरों पर बोझ न पड़े।
एक्स पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को एक्स पर @AgentSaffron नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इस वीडियो में एक स्थानीय कुली एक व्यक्ति को अपनी पीठ पर बंधी टोकरी जैसी पारंपरिक गाड़ी में बैठाकर ले जाते हुए दिखाई दे रहा है। यात्री न तो बुजुर्ग है और न ही शारीरिक रूप से कमजोर, जो तुरंत ऑनलाइन चर्चा का केंद्र बन गया। वीडियो में कुली को धीरे-धीरे पहाड़ी पर चढ़ते हुए दिखाया गया है, जो उस व्यक्ति के भारी वजन के कारण संघर्ष करता हुआ दिखाई दे रहा है। कई बार वह थका हुआ प्रतीत होता है क्योंकि वह ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्ते पर संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। वहीं, यात्री को गाड़ी के अंदर आराम से बैठे हुए देखा जा सकता है, जिसके बगल में एक बैग रखा हुआ है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने जताई नाराजगी
इस वीडियो को देखने के बाद यूजर्स ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जिनमें से कुछ ने पर्वतीय तीर्थयात्राओं के लिए शारीरिक रूप से तैयार न होने के लिए लोगों की आलोचना की। एक यूजर ने कहा, 'ये वही कार्बोहाइड्रेट से भरपूर बूढ़े लोग सोशल मीडिया पर शेखी बघारते हैं कि उनके परदादा आलू परांठा, दाल चावल और रोटी-सब्जी खाकर 100 साल तक जीवित रहे, लेकिन उनमें से कई लोग पहाड़ी तीर्थयात्रा पर 200 मीटर से अधिक चढ़ाई नहीं कर सकते। इसलिए वे अंत में किसी स्थानीय व्यक्ति को किराए पर लेकर ऊपर तक जाते हैं, और किराए को लेकर मोलभाव करते हुए शिकायत करते हैं कि मैगी 60 रुपये में बिक रही है।' दूसरे ने लिखा कि, 'आप बिलकुल सही हैं। मुझे उम्मीद है कि कम से कम अगली पीढ़ी अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग होगी और प्रोटीन सेवन का ध्यान रखेगी। जर्मनी में लोग नियमित रूप से हाइकिंग पर जाते हैं और यहां तक कि बुजुर्ग (70+ वर्ष के लोग) भी इसमें भाग लेते हैं।' तीसरे ने कहा कि, 'हां, क्योंकि उनमें शारीरिक गतिविधि बिलकुल नहीं होती, जबकि परदादा दिनभर शारीरिक श्रम करते थे।' एक और यूजर ने लिखा कि, 'अयोग्य हिंदुओं के लिए तीर्थयात्रा प्रतिबंधित होनी चाहिए। तीर्थयात्रा केवल उन स्वस्थ लोगों के लिए होनी चाहिए जो यात्रा को पूरा कर सकें, यही हिंदू धर्म में तीर्थयात्रा का महत्व है। यदि आपकी आस्था भगवान से मिलने के लिए मजबूत नहीं है, तो आप उनसे मिलने के योग्य नहीं हैं।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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