Viral Video : लंदन की गर्म और भीड़भाड़ वाली ट्यूब में यात्रा करने के बाद बेंगलुरु मेट्रो में सफर करना 'लग्जरी' लगता है। यह अनुभव हाल ही में एक वायरल इंस्टाग्राम वीडियो में सामने आया, जिसने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी।एक भारतीय ट्रैवलर ने लंदन अंडरग्राउंड (ट्यूब) की यात्रा का वर्णन करते हुए बताया कि पीक आवर्स में ट्रेन और स्टेशन बिना एयर-कंडीशनिंग के गर्म हो जाते हैं। वे स्वेटिंग महसूस कर रही थीं और सोच रही थीं कि मेट्रो में पसीना क्यों आ रहा है। कई लाइनें और स्टेशन पुराने होने के कारण AC नहीं रखते, जिससे भीड़ में असुविधा बढ़ जाती है। गर्मी, भीड़ और असुविधा ने उन्हें कल्चरल शॉक दिया।
इंस्टाग्राम पर बताई पूरी सच्चाई
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @hatitude.girl नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इसके कैप्शन में लिखा है कि, "आपको विश्वास नहीं होगा, लेकिन यूके में एक ऐसा क्षण आया जिसने मुझे वास्तव में आश्चर्यचकित कर दिया, जब मैं लंदन से टावर ब्रिज की ओर मेट्रो से यात्रा कर रही थी। अचानक मुझे एहसास हुआ कि मुझे पसीना आ रहा है। और मुझे याद है कि मैं सोच रहा थी कि मेट्रो के अंदर मुझे पसीना क्यों आ रहा है? तभी मुझे समझ आया कि लंदन अंडरग्राउंड की कई ट्रेनों और स्टेशनों में एयर कंडीशनिंग नहीं है।" उस महिला ने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया के सबसे बड़े शहरों में से एक में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में एयर कंडीशनिंग की कमी उसके लिए एक झटके की तरह थी। उन्होंने लिखा कि, "मेट्रो स्टेशन भी बिना एसी वाले अंडरग्राउंड रेलवे प्लेटफॉर्म जैसे लगते थे। व्यस्त समय में वहां गर्मी और भीड़भाड़ हो जाती है, जो मेरे लिए एक बड़ा सांस्कृतिक झटका था।"
बेंगलुरु मेट्रो की तारीफ
यूजर ने बताया कि विदेश यात्रा ने उन्हें उन चीजों के प्रति एक नई सराहना प्रदान की है जिन्हें हम भारत में अक्सर हल्के में लेते हैं, विशेष रूप से तेजी से विकसित हो रही सार्वजनिक परिवहन प्रणाली के प्रति। उन्होंने लिखा कि, "बेंगलुरु में मेट्रो में कदम रखते ही, स्टेशन और ट्रेन दोनों पूरी तरह से वातानुकूलित होते हैं। यह ठंडा, आरामदायक और मौसम के अनुकूल बना हुआ है। यात्रा से वाकई नजरिया बदल जाता है। कभी-कभी घर पर जिन चीजों को हम सामान्य मानते हैं, वे दुनिया के अन्य हिस्सों में विलासिता साबित होती हैं। वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया यूजर्स ने बताया कि कार और तेल लॉबी के दबाव के कारण अधिकांश पश्चिमी देशों ने अपने सार्वजनिक परिवहन बुनियादी ढांचे को उन्नत नहीं किया है। वहीं, भारत जैसे देश सार्वजनिक परिवहन में सुधार के लिए भारी निवेश कर रहे हैं।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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