ऋषिकेश के घाटों के पास कुछ घंटे बिताने से एक चौंका देने वाली कमाई का प्रयोग हुआ है जिसने ऑनलाइन बहस छिड़ गई है। एक व्यक्ति ने दावा किया कि उसने गंगा दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं को तिलक लगाकर मात्र तीन घंटे में 2,000 रुपये से अधिक कमा लिए। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए उनके अनुभव ने कई लोगों को आश्चर्यचकित और उत्सुक कर दिया है कि उन्होंने इतने कम समय में इतना पैसा कैसे कमा लिया।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया एक्सपेरिमेंट का वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @mrtan.e_ नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में शख्स ने बताया कि कैसे उसने उत्तराखंड के ऋषिकेश में गंगा के किनारे कुछ घंटे भक्तों को तिलक लगाने में बिताने का फैसला किया। उसके अनुसार, दिन की शुरुआत अच्छी नहीं रही।शुरुआती कुछ घंटों में बहुत कम लोग उनके पास आए और कमाई धीमी रही। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें यह संदेह होने लगा था कि क्या यह प्रयोग सफल भी होगा या नहीं। जैसे-जैसे शाम ढलती गई और प्रसिद्ध गंगा आरती के लिए भीड़ उमड़ने लगी, वैसे-वैसे परिस्थितियां बदल गईं। जैसे-जैसे अधिक श्रद्धालु आने लगे, लोग उनसे तिलक लगवाने के लिए आने लगे। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने तो सामान्य 20 रुपये दिए, वहीं कुछ ने स्वेच्छा से अधिक राशि दान की। कुछ लोगों ने तिलक लगवाने के बाद 100 रुपये भी दिए। एक्सपेरिमेंट के अंत तक, उस व्यक्ति ने दावा किया कि उसने लगभग तीन घंटे में 2,350 रुपये एकत्र कर लिए थे। उसने बताया कि अधिकांश धन आरती के आसपास शाम के व्यस्त समय में प्राप्त हुआ।
'महीने में 70 हजार कमा सकते हैं'
इस वीडियो में आगे शख्स ने एक महीने की संभावित आय का अनुमान लगाया। अपने तीन घंटे के प्रयोग के आधार पर, उसने दावा किया कि यदि आय स्थिर बनी रहती है, तो इसी तरह की दिनचर्या से संभावित रूप से प्रति माह लगभग 70,000 रुपये कमाए जा सकते हैं। यह वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया और देखते ही देखते लोगों का ध्यान आकर्षित कर लिया। पोस्ट के कैप्शन में लिखा था, '8.5 लाख प्रति वर्ष (3 घंटे)। अपने बेरोजगार दोस्तों के साथ शेयर करें।'
यूजर्स ने दी मजेदार प्रतिक्रियाएं
इस वीडियो को देखने के बाद इस पर कई यूजर्स ने प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने लिखा कि, 'अगली गर्मियों में इंटर्नशिप की योजना।'
दूसरे यूजर ने लिखा कि, 'अगर आप मुझे यहां देखें तो हैरान मत होना।'
तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'सबसे मजेदार बात यह है कि आप लोगों की मदद कर रहे थे।'
चौथे यूजर ने लिखा कि, 'मैं अभी इस्तीफा दे रहा हूं, सुबह जल्दी बस पकड़ूंगा।'
सभी लोगों की राय इस प्रयोग के प्रति एक जैसी नहीं थी। एक यूजर ने लिखा कि, 'पैसा देना स्वैच्छिक होना चाहिए, अनिवार्य नहीं, लेकिन दुख की बात है कि कुछ लोगों/मानवीय लालच ने इसे एक तरह का व्यवसाय बना दिया है। कुछ लोगों के लिए यह उनकी दैनिक आय का एक हिस्सा है, वे खुद 10-20 रुपये दे देते हैं और बाकी लोग बिना पूछे ही बाकी रकम अपने देवताओं के प्रति कृतज्ञता या आस्था के रूप में दे देते हैं।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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