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'लवणेन भोज्यम्' तो खूब सुना होगा मगर इसका मतलब जानते हैं, हंसने से पहले जरूर जानें

Amazing Facts : सोशल मीडिया पर आपने कई तरह की कहावतों और मुहावरों के बारे में पढ़ा होगा। मगर, आज हम आपको ऐसी एक कहावत के बारे में बताएंगे​ जिसका मतलब जाने बिना लोग उसका मजाक खूब उड़ाते हैं।

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Image Source : FREEPIK 'लवणेन भोज्यम्...' कहावत का अर्थ।

Amazing Facts : इंटरनेट की दुनिया में किसी शख्स द्वारा कहा गया कथन कब वायरल हो जाए ये नहीं कहा जा सकता। ऐसा ही एक कथन है 'लवणेन भोज्यम्' जिसके मीम्स सोशल मीडिया पर काफी वायरल होते हैं और लोग संस्कृत की इस सुभाषित का अर्थ समझे बिना इसका काफी मजाक उड़ाते हैं। क्या आपको पता है कि 'लवणेन भोज्यम्' संस्कृत का एक वाक्यांश है और जिसका पूरा अर्थ काफी गहरा है। हालांकि लोगों को इसका मतलब नहीं पता होता है और वे अर्थ का अनर्थ कर उसका काफी मजाक उड़ाते हैं। आज हम आपको इस सुभाषित को पूरा कर अर्थ सहित समझाएंगे। 

सोशल मीडिया पर खूब मजे लेते हैं यूजर्स 

'लवणेन भोज्यम्' संस्कृत भाषा से उद्धृत एक गूढ़ बात है मगर, शब्दों के अपभ्रंश में सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे अपनी सुविधानुसार परिभाषित किया और मीम्स बनाकर मजे लेने लगे जबकि इस वाक्यांश में मजे लेने लायक कुछ भी नहीं है फिर भी लोग इसे धड़ल्ले से शेयर किए जा रहे हैं।

क्या है पूरी सुभाषित 

यदि आप इस कहावत या सुभाषित को पूरा आज तक नहीं सुन पाए हैं तो आज हम आपको इसके बारे में बता ही देते हैं। संस्कृत वाक्यांश के शब्द कुछ इस प्रकार हैं: 

"अङ्गेन गात्रं नयनेन वक्त्रं न्यायेन राज्यं लवणेन भोज्यम्,
धर्मेण हीनं खलु जीवितं च न राजते चन्द्रमासा बिना निशा।।"

क्या होता है इसका अर्थ

 इसके अर्थ के बारे में एक्स पर @vikasvaibhavips ने बताया है। अपनी पोस्ट के कैप्शन में यूजर ने कहावत का पूरा अर्थ भी समझाया। उन्होंने लिखा कि, 'बिना किसी अंग के मानव शरीर, बिना आंखों के चेहरा, एक प्रभावी और शक्तिशाली न्यायपालिका के बिना एक राष्ट्र, बिना नमक के पका हुआ भोजन, धार्मिकता और धर्म का पालन किए बिना मानव जीवन, वास्तव में अलंकृत या दीप्तिमान नहीं कहा जा सकता है, ठीक वैसे ही जैसे आकाश में चंद्रमा के बिना एक अंधेरी रात।' 

अब ध्यान रखें 

सोशल मीडिया पर इस वाक्यांश को लोग तोड़-मरोड़कर पेश करते हैं जिसके बाद उसका मजाक उड़ाते हैं जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। 'लवणेन भोज्यम्' का अर्थ एक प्रकार से ये भी बताया जाता है कि, 'भोजन नमक के साथ ग्रहण करना योग्य है।' अब अगर आप कभी भी इस संस्कृत वाक्यांश का मजाक उड़ाते हुए किसी को सोशल मीडिया या वास्तविकता में देखें तो इसका मतलब उन्हें जरूर बताएं। 
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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