Amazing Facts : पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान 'झालमुड़ी' सोशल मीडिया पर खूब सर्च किया गया, जो कि बंगाल के प्रमुख स्नैक्स आइटम में शुमार है। देश ही नहीं बल्कि, विदेश में भी इसकी रेसिपी को कई लोगों ने जानना चाहा। हालांकि, भारत में इसका क्रेज इतना ज्यादा है कि हर यहां के लगभग हर शहर में कहीं न कहीं फुटपाथ पर आपको झालमुड़ी या भेलपुड़ी के स्टॉल देखने को मिल जाएंगे। मगर, क्या आपने कभी सोचा है कि बंगाल में झालमुड़ी कही जाने वाली ये डिश कई जगहों पर भेलपुड़ी के नाम से क्यों प्रसिद्ध है ? आखिर झालमुड़ी और भेलपुड़ी में क्या अंतर है ? आज हम आपको इसी के बारे में बताने वाले हैं।
आखिर कैसे ट्रेंड में आई झालमुड़ी
गौरतलब है कि, झालमुड़ी बंगाल के स्नैक्स में बरसों से प्रचलित है। मगर, बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक दुकान पर जाकर बच्चों संग झालमुड़ी शेयर कर खाई तो उसका वीडियो काफी ज्यादा वायरल हो गया और उस एक वीडियो ने 24 घंटे में करोड़ों व्यूज हासिल कर लिए। वीडियो में पीएम मोदी ने दुकानदार से थोड़ा हंसी-मजाक भी किया और फिर इसके बाद से सोशल मीडिया पर ये वीडियो आग की तरह फैल गया। कई लोगों ने झालमुड़ी की रेसिपी ढूंढ़़कर कोलकाता स्टाइल में बनाना भी शुरू कर दिया।
झालमुड़ी क्या होती है
दरअसल, बांग्ला भाषा में "झाल" का अर्थ है तीखा/मसालेदार और "मुरी" का अर्थ है मुरमुरा यानी "पफ्ड राइस।" मुरमुरा, प्याज, टमाटर, खीरा, उबला आलू, हरी मिर्च, धनिया, चनाचूर (एक किस्म की दालमोठ), सेव, मूंगफली, नमकीन, सरसों का तेल, चाट मसाला, नींबू, नमक और भुना मसाला इन सभी को मिक्स कर नारियल के टुकड़े के साथ इस झन्नाटेदार झालमुड़ी को तैयार किया जाता है। ये बंगाल (खासकर कोलकाता) का मशहूर स्ट्रीट फूड है। यह एक चटपटा, खस्ता और हल्का नाश्ता है।
झालमुड़ी और भेलपुड़ी में अंतर
जिस प्रकार झालमुड़ी नाम कोलकाता में फेमस है ठीक उसी प्रकार महाराष्ट्र में भेलपुड़ी नाम काफी प्रचलित है। झालमुड़ी और भेलपुड़ी को एक ही डिश माना जाता है मगर, दोनों को बनाने का तरीका एकदम अलग है। ये तरीका ही दोनों के स्वाद को अलग बनाता है। झालमुड़ी के बारे में तो हमने आपको बताया मगर अब भेलपुड़ी के बारे में भी जान लें। दरअसल, भेलपुड़ी में मुरमुरा के साथ भरपूर सेव, मूंग दाल, आलू, प्याज-टमाटर के साथ-साथहरी, लाल और इमली वाली चटनी डाली जाती हैं। इमली की मीठी-खट्टी चटनी इसका मुख्य आकर्षण है। इससे इसका स्वाद मीठा-खट्टा-तीखा होता है। इसमें प्रमुख अंतर ऐसे भी समझ सकते हैं कि, झालमुड़ी में सरसों का तेल इस्तेमाल होता है जबकि, भेल में नहीं। दोनों ही चाय के साथ परफेक्ट हैं, लेकिन स्वाद प्रेमी आसानी से अंतर पहचान लेते हैं। झालमुड़ी उन लोगों को पसंद आती है जो तीखा और खस्ता चाहते हैं, जबकि भेलपूरी मीठा-खट्टा कॉम्बिनेशन पसंद करने वालों की पहली पसंद है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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