Trending GK Quiz : भारत के दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश का इतिहास प्रशासनिक बदलावों और प्राचीन राजवंशों की गाथाओं से भरा पड़ा है। यह इकलौता राज्य है जिसकी राजधानी तीन बार बदली गई। ap.gov.in और आधिकारिक रिपोर्ट्स के अनुसार आंध्र प्रदेश की राजधानी का सफर कुरनूल से हैदराबाद होते हुए अमरावती तक पहुंचा है। कई प्राचीन राजवंशों ने यहां शासन किया, जिससे इसकी सांस्कृतिक विरासत समृद्ध हुई।
कब-कब बदली गई राजधानी
- कुरनूल (1953-1956): 1 अक्टूबर 1953 को मद्रास राज्य से अलग होकर आंध्र राज्य के गठन के समय कुरनूल को अस्थायी राजधानी बनाया गया। यह भाषाई आधार पर पहला राज्य था।
- हैदराबाद (1956-2014): 1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत तेलुगु भाषी क्षेत्रों को मिलाकर आंध्र प्रदेश बना। निजाम शासन वाले हैदराबाद को राजधानी घोषित किया गया। इसके बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसका उद्घाटन किया और एन. संजीव रेड्डी पहले मुख्यमंत्री बने।
- अमरावती (2014 के बाद, 2026 में पुष्टि): 2014 में राज्य विभाजन से तेलंगाना अलग हुआ और हैदराबाद उसकी राजधानी बना। आंध्र प्रदेश के लिए नई राजधानी की जरूरत पड़ी। इसके बाद चंद्रबाबू नायडू सरकार ने अमरावती को चुना। बाद में तीन राजधानियों (अमरावती-विधायी, विशाखापत्तनम-कार्यकारी, कुरनूल-न्यायिक) का प्रस्ताव आया, लेकिन 2026 के आंध्र प्रदेश पुनर्गठन संशोधन अधिनियम के बाद अमरावती को एकमात्र राजधानी का दर्जा मिल गया।
किन राजवंशों ने किया शासन
आंध्र प्रदेश का इतिहास वैदिक काल से जुड़ा है। ‘ऐतरेय ब्राह्मण’ में इसे ‘दक्षिण पथ’ कहा गया। मौर्य काल में अशोक के शिलालेखों में आंध्रों का उल्लेख है। मेगस्थनीज ने यहां 30 किलेबंद नगरों और शक्तिशाली सेना का जिक्र किया। यहां किए गए राजवंशों के शासन को इस प्रकार से समझा जा सकता है:
- सातवाहन (230 ई.पू.-220 ई.): दक्कन पर शासन, अमरावती का विकास।
- इक्ष्वाकु, पल्लव, पूर्वी चालुक्य: स्थानीय शासन और सांस्कृतिक उन्नति।
- काकतीय (12वीं-14वीं शताब्दी): वारंगल से शासन, तेलुगु साहित्य को बढ़ावा (तिक्कना का महाभारत अनुवाद)।
- विजयनगर साम्राज्य, क़ुतुब शाही, निजाम: मध्यकालीन और आधुनिक काल में विविध शासन।
ये भी जानें
आंध्र प्रदेश की भूमि गोदावरी-कृष्णा नदियों से उपजाऊ है। यहां बौद्ध, जैन और हिंदू मंदिरों के अवशेष मिलते हैं। स्वतंत्रता के बाद भाषाई आंदोलन (पोट्टी श्रीरामुलु की बलिदानी) ने अलग राज्य की मांग को मजबूत किया। अमरावती अब विकास का केंद्र है। राज्य कृषि, आईटी और फार्मा क्षेत्र में आगे है। इतिहासकारों के अनुसार, बार-बार राजधानी बदलाव क्षेत्रीय संतुलन और विकास की कोशिशें हैं। आंध्र प्रदेश ‘काकतीयों की वीरता, सातवाहनों की व्यापारिक कुशलता और आधुनिक भारत की एकता’ का प्रतीक है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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